चुनावी वादा निभाते हुए निजी अंशदान के लिए खोला संयुक्त बैंक खाता, जमा कराए ₹10 लाख; हर माह वेतन सहित ₹15 हजार और देंगे जनकल्याण कार्यों के लिए
अमर ज्वाला //मंडी
वर्तमान समय में राजनीति और पंचायती राज संस्थाओं को लेकर आम लोगों के मन में यह धारणा लगातार गहराती जा रही है कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि जनता की सेवा से अधिक अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुट जाते हैं। ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा और संसद तक अनेक ऐसे उदाहरण सामने आते रहे हैं, जहां एक कार्यकाल पूरा होते-होते जनप्रतिनिधियों की संपत्ति कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दौर में जिला मंडी के बल्ह विकासखंड की नवगठित टिक्कर कलां पंचायत के नवनिर्वाचित प्रधान सुरेश शर्मा ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने राजनीति में सेवा, ईमानदारी और जवाबदेही का नया संदेश दिया है।
चुनाव के दौरान जनता से किए अपने वादे को निभाते हुए प्रधान सुरेश शर्मा ने हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक, बैहना में पंचायत के जनकल्याण एवं विकास कार्यों के लिए एक संयुक्त बैंक खाता खुलवाकर उसमें अपने निजी अंशदान के रूप में ₹10 लाख जमा करवा दिए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने घोषणा की है कि प्रधान के रूप में मिलने वाले मानदेय सहित हर महीने ₹15 हजार इसी खाते में जमा करेंगे। इस प्रकार हर वर्ष लगभग ₹2 लाख तथा पांच वर्षों में करीब ₹10 लाख की अतिरिक्त राशि भी इस खाते में जमा होगी। यानी अपने कार्यकाल के दौरान वे पंचायत के विकास के लिए करीब ₹20 लाख का निजी योगदान देंगे।

सुरेश शर्मा ने कहा कि टिक्कर कलां पंचायत नई गठित हुई है और अभी कई बुनियादी सुविधाओं के विकास में समय लगेगा। ऐसे में अनेक जनहित के कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें तत्काल पूरा करना आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से उन्होंने निजी धनराशि उपलब्ध करवाई है ताकि विकास कार्य संसाधनों के अभाव में प्रभावित न हों।
उन्होंने बताया कि इस खाते से होने वाला प्रत्येक लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी रहेगा। राशि केवल चेक के माध्यम से लाभार्थी के नाम जारी होगी, जबकि खाते का नियमित ऑडिट कार्य समिति के ऑडिटर द्वारा किया जाएगा और उसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।
प्रधान ने बताया कि इस राशि से पंचायत के सभी वार्डों में मुख्य रास्तों पर उगी कांटेदार झाड़ियों और खरपतवार की सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। इन रास्तों से प्रतिदिन स्कूली छात्र-छात्राएं तथा ग्रामीण गुजरते हैं और झाड़ियों के कारण दुर्घटना व सांप-बिच्छुओं का खतरा बना रहता था। इस कार्य की मजदूरी भी इसी खाते से दी जाएगी।
इसके अलावा उन्होंने चुनाव के दौरान पंचायत भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने का जो वादा किया था, उसे भी दोहराते हुए कहा कि यदि सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होती है तो वह पांच से सात बिस्वा निजी भूमि दान करेंगे। यदि पंचायत भवन के लिए सरकार की निर्धारित दस बिस्वा भूमि की आवश्यकता पूरी नहीं हो पाती और पंचायत चाहे तो वे अपनी भूमि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा आयुर्वेदिक औषधालय के लिए स्वास्थ्य विभाग के नाम करने को भी तैयार हैं।
आज जब राजनीति में सेवा की भावना पर अक्सर सवाल उठते हैं और कई जनप्रतिनिधि जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाते हुए निजी संपत्ति बढ़ाने के आरोपों में घिर जाते हैं, ऐसे समय में टिक्कर कलां पंचायत के प्रधान सुरेश शर्मा का यह निर्णय न केवल उनके चुनावी वादों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह उन जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश है जो लोकतांत्रिक पदों को जनसेवा के बजाय निजी लाभ का माध्यम बना लेते हैं।
टिक्कर कलां पंचायत में उठाया गया यह कदम अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि इसी सोच और ईमानदारी के साथ कार्य करें तो लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा राजनीति की वास्तविक पहचान जनसेवा के रूप में स्थापित होगी।
