*पहले शिक्षकों की नियुक्तियों पर उठे थे सवाल, अब शोध प्रकाशन की गुणवत्ता पर भी खड़े हुए प्रश्न*
सुभाष ठाकुर*******
सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी एक बार फिर चर्चाओं में है। पहले विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर विवाद और सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से उठे सवाल सुर्खियों में रहे थे। अब विश्वविद्यालय से जुड़े एक प्रोफेसर के सह-लेखक वाले शोधपत्र को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्था स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका Applied Physics A द्वारा आधिकारिक रूप से रिट्रैक्ट (Retraction) किए जाने से विश्वविद्यालय की अकादमिक कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
स्प्रिंगर नेचर द्वारा 13 जुलाई 2026 को जारी रिट्रैक्शन नोट में कहा गया है कि संबंधित शोधपत्र “Enhanced structural and magnetic properties of Al–Cr-substituted SrFe12O19 hexaferrite system” में पहले प्रकाशित शोधपत्र से महत्वपूर्ण समानता (Significant Overlap) पाई गई।

इसके अतिरिक्त शोधपत्र के कई चित्रों (Figures 1, 3, 4, 5, 7, 8 और 9) के दोहराव (Duplication) पर भी आपत्ति दर्ज की गई। इन कारणों से संपादक ने शोधपत्र को वैज्ञानिक रिकॉर्ड से वापस लेने का निर्णय लिया।
*रिट्रैक्शन नोट में प्रकाशित लेखकों की सूची में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के किस प्रोफेसर के नाम सह-लेखक के रूप में दर्ज है।* जानने के लिए रिट्रैक्शन गूगल स्कॉलर प्रोफाइल पर जा कर सभी देख सकते हैं वहां भी दिखाई दे रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सरदार पटेल विश्वविद्यालय शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर विवादों में रहा था। भाजपा मंडल उपाध्यक्ष विपिन गुजरिया ने सूचना के अधिकार के माध्यम से विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए थे, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पर व्यापक बहस छिड़ी थी। अब शोधपत्र के रिट्रैक्शन के बाद विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध प्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि रिट्रैक्शन नोट में किसी भी लेखक पर शोध में धोखाधड़ी (Fraud) का निष्कर्ष नहीं दिया गया है। संपादक ने केवल पूर्व प्रकाशित शोध से समानता और चित्रों के दोहराव को रिट्रैक्शन का आधार बताया है। वहीं, रिट्रैक्शन नोट के अनुसार कुछ सह-लेखकों ने इस निर्णय से असहमति भी जताई है।
अब विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित प्रोफेसर की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। अकादमिक जगत में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उच्च शिक्षण संस्थानों की विश्वसनीयता का आधार उनके शोध कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता होती है।
