शिकायतकर्ता ने गैर-हिमाचली को भूमि हस्तांतरण, राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव और इंतकाल बहाली के प्रयासों पर उठाए सवाल; मामला विभिन्न राजस्व अधिकारियों के समक्ष पहुंचा
सुभाष ठाकुर*******
मंडी जिले के जोगिंदरनगर क्षेत्र में एक भूमि के इंतकाल (म्यूटेशन) को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। यह विवाद तब बड़ा हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों के लोग कृषि भूमि सीधे नहीं खरीद सकते। इसका मुख्य कारण हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 है, जो गैर-कृषक (Non-Agriculturist) व्यक्तियों को कृषि भूमि खरीदने पर प्रतिबंध लगाती है। इस मामले में भी कुछ यही शिकायत होने के कारण मामला विवादों में घिरता चला आया है । उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2003 में संबंधित भूमि का हस्तांतरण कथित रूप से नियमों के विपरीत किया गया था और उस समय आवश्यक कानूनी अनुमति नहीं ली गई।

दस्तावेजों में उल्लेख है कि बाद में इस मामले की शिकायत राजस्व विभाग के समक्ष की गई, जिसके बाद वर्ष 2011 में राजस्व अभिलेखों में परिवर्तन कर संबंधित भूमि को हिमाचल प्रदेश सरकार के नाम दर्ज किया गया। इसके बावजूद वर्ष 2022 से 2023 के बीच राजस्व रिकॉर्ड में पुनः बदलाव होने का दावा किया गया है, जिसे लेकर विवाद और गहरा गया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस मामले के विरुद्ध अपील दायर की गई थी। उपलब्ध आदेशों के अनुसार, 21 अगस्त 2024 को एक प्रकरण में पूर्व आदेश को निरस्त किया गया तथा उसके अनुपालन में 26 अक्टूबर 2024 को संबंधित इंतकाल को निरस्त किए जाने का उल्लेख मिलता है।
इसके बाद वर्ष 2025 में दोनों पक्षों के बीच समझौता (Compromise Deed) होने तथा डिविजनल कमिश्नर, मंडी के समक्ष लंबित मामला वापस लेने के दस्तावेज भी संलग्न हैं। आदेश में मामला वापस लिए जाने का उल्लेख किया गया है।
हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामला वापस लिए जाने के बावजूद संबंधित इंतकाल को पुनः बहाल कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी संबंध में मुख्यमंत्री सेवा संकल्प पोर्टल पर भी राजस्व विभाग को शिकायत दर्ज कर उचित कार्रवाई और मामले की जांच की मांग की गई है।
