अमर ज्वाला//शिमला
मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता में उनके संबंध में की गई टिप्पणियों को पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और व्यक्तिगत हमला बताया है। बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि संबंधित प्रेस वार्ता का वीडियो देखने के बाद उन्होंने अपनी बात जनता के समक्ष रखने का निर्णय लिया।
नरेश चौहान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने उन पर किसी कथित बड़ी डील में शामिल होने का आरोप लगाया है तथा उनके पुत्र पर हुए जानलेवा हमले और कथित अपहरण के प्रयास को भी उसी तथाकथित डील से जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि बिना किसी तथ्य और प्रमाण के किसी व्यक्ति तथा उसके परिवार को इस प्रकार विवाद में घसीटना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया है कि उनके पास इस संबंध में दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं और वे उन्हें सार्वजनिक करेंगे। साथ ही उनके पेशे और कार्यशैली पर भी प्रश्न उठाए गए हैं।
नरेश चौहान ने कहा कि वह वर्ष 2003 से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े हुए हैं तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में प्रवक्ता सहित विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। पिछले लगभग 23 वर्षों से उन्होंने पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों और जनहित के मुद्दों को मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि अपने सार्वजनिक जीवन में उन्होंने सदैव राजनीतिक मर्यादा का पालन किया है और कभी भी किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत टिप्पणी या आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति नहीं की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतने वरिष्ठ नेता, जो पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे हैं और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष हैं, उनसे इस प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति और उसके परिवार को विवादों में घसीटना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
नरेश चौहान ने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष के पास कथित डील अथवा उनके पुत्र पर हुए हमले से संबंधित कोई दस्तावेजी प्रमाण हैं, तो उन्हें तत्काल सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता के सामने सच्चाई आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके पेशे, कार्यशैली अथवा कार्यप्रणाली पर कोई आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उनसे संबंधित तथ्य और प्रमाण भी सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने कहा कि बिना साक्ष्यों के किसी की छवि धूमिल करने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
