गुरुजनों को नमन के दिन दिशा बैठक में कंगना के सख्त तेवरों ने छेड़ी नई सियासी चर्चा

छह भाजपा विधायक दूर, तीन पहुंचे; अधिकारियों पर बरसीं कंगना—बोलीं, केंद्र से पैसा भेज रही हूं, खर्च नहीं हो रहा

अमर ज्वाला//मंडी

शनिवार 05 सितंबर को शिक्षक दिवस पर जहां सोशल मीडिया में लोग अपने-अपने गुरुजनों को बधाई और शुभकामनाएं देकर उनके प्रति सम्मान प्रकट कर रहे थे, वहीं मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत की जिला प्रशासन और विधायकों के साथ हुई दिशा बैठक में उनके अधिकारियों पर सख्त तेवरों ने मंडी की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी।

कंगना ने अधिकारियों से कहा कि वह केंद्र से मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए पैसा भेज रही हैं, लेकिन अधिकारी विकास कार्यों पर उसे खर्च नहीं कर रहे। उनका यह भी कहना था कि नैशनल मीडिया में उनकी छवि ऐसी दिखाई जा रही है कि सांसद ने क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया।

कंगना के सख्त लहजे पर सवाल यह भी उठ रहा है कि आईएएस, आईपीएस और एचएएस जैसे अधिकारी, जो यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया से गुजरकर प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हैं, क्या उन्हें सार्वजनिक बैठक में ऐसे शब्द सुनकर खामोश रहने को मजबूर होना चाहिए? यदि किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली में कमी है तो आंकड़ों, रिकॉर्ड और जवाबदेही के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं यह भी समझना जरूरी है कि किसी योजना का पैसा ब्लॉक स्तर तक पहुंचने के बाद काम तत्काल धरातल पर नहीं उतरता। जमीन, एनओसी, विभागीय अनुमति, तकनीकी स्वीकृति या स्थानीय विरोध जैसी कई अड़चनें सामने आती हैं। ऐसे में सांसद और जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के साथ मौके पर उतरकर यह देखना चाहिए कि पैसा आखिर किस स्तर पर और क्यों अटका है।

दिशा बैठक का राजनीतिक पहलू भी बेहद अहम रहा। मंडी जिले के नौ भाजपा विधायकों में से सांसद कंगना की  दिशा मीटिंग में केवल तीन विधायकों ने खुद को शामिल किया जिसमें बल्ह से इंद्र सिंह गांधी, द्रंग से पूर्ण चंद ठाकुर और सरकाघाट से दलीप ठाकुर ही बैठक में मौजूद रहे, जबकि छह विधायकों में से सिराज से नेता प्रतिपक्ष पूर्व मुख्यमंत्री, नाचन से विनोद चौधरी, सुंदर नगर से  राकेश जम्वाल, जोगिंदर नगर से प्रकाश राणा, मंडी सदर से अनिल शर्मा,  करसोग से दीप राज इन सभी ने सांसद कंगना रनौत की दिशा मीटिंग से दूरियां बनाए रखी । सांसद और स्थानीय भाजपा नेतृत्व के बीच पहले से चल रही चर्चाओं के बीच छह विधायकों की दूरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमर ज्वाला ने कुछ दिन पहले ही मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद द्वारा दिल्ली के जंतर मंतर के आंदोलन में शामिल हुए जैनजी को गटर जैनजी करार दिया था। कंगना देश भर में ट्रॉल होने के बाद मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा के स्थानीय नेतृत्व में बदलाव कर राजा सिंह मल्होत्रा को लेकर बढ़ती चर्चाओं का मुद्दा उठाया था। अब दिशा बैठक में छह विधायकों की दूरी और अधिकारियों पर कैमरे के सामने निकाली अपनी भड़ास सांसद की नाराजगी ने उस चर्चा को और हवा दे दी है।

सवाल यह भी है कि यदि सांसद को वास्तव में संसदीय क्षेत्र के विकास की इतनी चिंता है तो जनता के बीच उनकी लगातार मौजूदगी क्यों दिखाई नहीं देती? जनता के बीच जाकर योजनाओं की जमीनी स्थिति देखने से ही पता चल सकता है कि पैसा क्यों खर्च नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्राथमिकता आखिर जनता का विकास है या नैशनल मीडिया में सांसद की छवि?

अधिकारियों को भी यह समझना होगा कि जब किसी बैठक में कैमरे और सोशल मीडिया मौजूद हों तो वहां बोले गए शब्द चारदीवारी में बंद नहीं रहते—वे देखते ही देखते पूरे प्रदेश तक पहुंच जाते हैं। दिशा बैठक के बाद अब मंडी में चर्चा यही है कि सांसद की नाराजगी का असर विकास की रफ्तार पर पड़ता है या फिर यह विवाद राजनीतिक और मीडिया की सुर्खियों तक ही सीमित रहेगा। वैसे तो सांसद कंगना ने पिछली मीटिंग में अधिकारियों को मीडिया के सामने यह भी आदेश दिए थे कि दिशा मीटिंग को पब्लिक को भी मालूम हो कि क्या चर्चा मीटिंग में चल रही है उसे लाईव स्क्रीन उपायुक्त कार्यालय के बाहर लगाया जाएगा । लेकिन हर मीटिंग में सांसद कंगना रनौत मीडिया की सुर्खियां बटोर कर नैशनल मीडिया में अपनी छवि पर आधिकारियों पर खूब बरसी।

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