ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रतिबिंबः राज्यपाल

युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया

नारी शक्ति वंदन अधिनियम विषय पर आयोजित भारतीय युवा संसद में 26 राज्यों के विद्यार्थियों ने लिया भाग

अमर ज्वाला//शिमला

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज युवाओं से संविधान के मूल्यों को बनाए रखने, लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल भविष्य के नेता ही नहीं बल्कि आज के भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के सक्रिय भागीदार और हितधारक भी हैं।

राज्यपाल ने जयपुर में अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भारतीय युवा संसद के 31वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित करते हुए देश के 26 राज्यों से आए युवा प्रतिनिधियों की भागीदारी की सराहना की। इन प्रतिनिधियों ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर सार्थक विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच भारत के लोकतंत्र की जीवंतता, समावेशिता और प्रगतिशील स्वरूप को प्रतिबिंबित करते हैं।

श्री गुप्ता ने भारतीय युवा संसद से वर्ष 1999 से अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि इस पहल ने विशेष रूप से वर्ष 2002 के बाद युवाओं को संविधान से परिचित करवाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को विकसित करने और राष्ट्र के सामने मौजूद चुनौतियों के प्रति उन्हें संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद को जिम्मेदार नागरिकता और भावी नेतृत्व की नर्सरी बताते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक भावना की जड़ें देश की गहरी सभ्यतागत परंपराओं में निहित हैं। वैदिक काल में ‘सभा’ और ‘समिति’ जैसी संस्थाओं में दिखाई देने वाली संवाद, विचार-विमर्श और सामूहिक निर्णय लेने की परंपराएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि भारतीय सभ्यता में सहभागी शासन को लंबे समय से महत्त्व दिया जाता रहा है।

राज्यपाल ने बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव और संस्थाओं तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह संवाद, भागीदारी, जवाबदेही, सहमति और असहमति की एक निरंतर प्रक्रिया है, जो जनविश्वास पर आधारित होती है। उन्होंने युवाओं से संवैधानिक मूल्यों को समझने और उन्हें अपने आचरण तथा सार्वजनिक जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया।

राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र के प्रति उनका दृष्टिकोण आज की युवा पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन यह मनभेद में परिवर्तित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हितों से ऊपर हमेशा राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को सदैव ही भारत की प्रगति और विकसित भारत के संकल्प का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने तथा महिलाओं के नेतृत्व में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के लिए व्यापक अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

श्री गुप्ता ने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए युवाओं, महिलाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और प्रत्येक नागरिक की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

राज्यपाल ने भारत के बढ़ते वैश्विक कद को रेखांकित करते हुए नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विभिन्न हितों वाले देशों को एक साथ लाने और उनके बीच सहमति बनाने की क्षमता देश की बढ़ती कूटनीतिक दक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत संघर्ष के बजाय संवाद, टकराव के बजाय कूटनीति और मानवता के व्यापक हित में विश्वास करता है।

उन्होंने कहा कि भारत अब ऐसा राष्ट्र नहीं है जो केवल दुनिया की बात सुनता है बल्कि भारत अब ऐसा राष्ट्र है जो दुनिया को एक साथ लाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका के लिए बढ़ता समर्थन देश के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

श्री गुप्ता ने युवा प्रतिभागियों से जिम्मेदार और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता बनने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्चे नेतृत्व का अर्थ समाज को साथ लेकर आगे बढ़ना, कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज बनना, लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करना और हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देना है।

राज्यपाल ने देशभर से आए युवा प्रतिनिधियों, आयोजकों, पदाधिकारियों और मार्गदर्शकों को राष्ट्रीय सत्र को सार्थक एवं सफल बनाने के लिए बधाई दी।

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