क्रिप्टो के नाम पर 35.05 लाख की ठगी का आरोप, कमांद में चला निवेश का खेल

पधर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) में दर्ज किया मामला, शिकायत में क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर रकम लेने का आरोप; आईआईटी मंडी के निदेशक के कार्यक्रम में शामिल होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा

सुभाष ठाकुर*******

क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर 35 लाख 5 हजार रुपये की कथित ठगी का मामला पधर पुलिस थाने में दर्ज हुआ है। पुलिस ने अभियोग संख्या 0016/2025, दिनांक 17 जनवरी 2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) में मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर बड़ी रकम जमा करवाने के लिए प्रेरित किया गया और बाद में उसकी राशि वापस नहीं मिली।

इस मामले को लेकर अब कमांद स्थित आईआईटी परिसर और वहां आयोजित बताए जा रहे एक कार्यक्रम से संबंधित वीडियो भी चर्चा में है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि आरोपी व्यक्ति के कार्यक्रम में आईआईटी मंडी के निदेशक भी शामिल हुए थे। वीडियो में निदेशक के हाथ में माइक दिखाई देने और कंपनी में पैसा जमा करने तथा एक साल में 100 प्रतिशत मुनाफे की बात कहे जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि तथा उसमें कही गई बातों का पूरा संदर्भ पुलिस जांच का विषय है।

निदेशक की मौजूदगी से लोगों का बढ़ा भरोसा—शिकायतकर्ता का दावा

शिकायत में सीधे तौर पर आईआईटी निदेशक को आरोपी नहीं बनाया गया है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे वीडियो को लेकर स्थानीय लोगों में यह चर्चा है कि जब एक बड़े शैक्षणिक संस्थान के निदेशक किसी कंपनी के कार्यक्रम में मौजूद होकर उसके निवेश की बात करते दिखाई दें, तो आम लोगों का उस कंपनी के प्रति भरोसा बढ़ना स्वाभाविक था।

शिकायतकर्ता और मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि इसी भरोसे के चलते आईआईटी परिसर से जुड़े सुरक्षा कर्मचारियों, प्रोफेसरों, कर्मचारियों तथा परिसर में कारोबार करने वाले कुछ दुकानदारों सहित अन्य लोगों ने भी कंपनी में पैसा जमा किया। आरोप है कि कंपनी के कार्यक्रमों में आईआईटी निदेशक की मौजूदगी के वीडियो लोगों के पास सुरक्षित थे और इन्हें दिखाकर दूसरे लोगों को भी कंपनी में निवेश करने के लिए भरोसा दिलाया जाता रहा।

वीडियो दिखाकर निवेश के लिए किया जाता रहा प्रेरित

 

स्थानीय लोगों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और कार्यक्रमों की तस्वीरों को कंपनी में निवेश के लिए भरोसे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा। लोगों को कथित तौर पर यह बताया जाता था कि जब आईआईटी के निदेशक और संस्थान से जुड़े लोग कंपनी के कार्यक्रम में दिखाई दे रहे हैं तथा कंपनी में निवेश की बात हो रही है, तो इसमें पैसा लगाना सुरक्षित होगा।

इसी भरोसे के बीच बड़ी संख्या में लोगों द्वारा कंपनी में रकम जमा किए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि जब कंपनी के पास करोड़ों रुपये जमा हो गए तो कंपनी से जुड़े लोग लोगों की पहुंच से बाहर होने लगे। बाद में जब निवेशकों को उनकी रकम और कथित मुनाफा नहीं मिला तो लोगों में चिंता बढ़ी और पुलिस में शिकायतें देने का सिलसिला शुरू हुआ।

शिकायत में 35.05 लाख रुपये देने का उल्लेख

पधर पुलिस को दी शिकायत में सुरजीत ठाकुर निवासी गांव टिकरी मुशैहरा, डाकघर चौंतड़ा, तहसील जोगिंद्रनगर ने बताया कि अक्टूबर 2025 में उसके संपर्क में आए गौरव अनिल धोते ने उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश के लिए प्रेरित किया।

शिकायतकर्ता के अनुसार उसने आरोपी तथा उससे संबंधित बताए गए बैंक खातों में अलग-अलग तिथियों पर 31 लाख 5 हजार रुपये ऑनलाइन जमा किए, जबकि 4 लाख रुपये नकद दिए। शिकायत में 9 अक्टूबर, 24 अक्टूबर, 27 अक्टूबर और 31 अक्टूबर 2025 को किए गए विभिन्न लेन-देन का विवरण भी दिया गया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे बीटीसी/यूएसडी लाइव ट्रेडिंग के माध्यम से पैसा बढ़ाने और वापस करने का भरोसा दिया गया। शिकायत में कंपनी के लेटरहेड पर सुरक्षा संबंधी दस्तावेज और सिक्योरिटी चेक दिए जाने का भी उल्लेख है।

शिकायत के अनुसार अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 तक आरोपी पक्ष से बातचीत और वीडियो चैट होती रही तथा रकम लौटाने का आश्वासन दिया जाता रहा। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उसने अपनी मूल राशि वापस मांगी तो रकम वापस नहीं मिली।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 10 जनवरी 2026 को कमांद स्थित कार्यालय में पैसे मांगने पहुंचने पर उसके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद उसने पुलिस से मामले की जांच और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की।

आईआईटी निदेशक का नाम शिकायत में नहीं

इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पधर पुलिस में दर्ज शिकायत में आईआईटी मंडी के निदेशक को आरोपी नहीं बनाया गया है। निदेशक की कथित भूमिका को लेकर फिलहाल आधार सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी के दावे हैं। इसलिए वीडियो में कही गई बातों, कार्यक्रम के उद्देश्य, कंपनी से निदेशक या संस्थान के संबंध तथा निवेश संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

मामले की जांच में यह भी सामने आना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी ने कितने लोगों से कितनी रकम जमा की, पैसा किन खातों में गया, क्रिप्टो ट्रेडिंग वास्तव में हुई या नहीं और कंपनी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या रही।

35.05 लाख रुपये की शिकायत से शुरू हुआ यह मामला अब उन तमाम सवालों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है कि आखिर कमांद में आयोजित कार्यक्रमों में कंपनी को किस आधार पर प्रचारित किया गया, लोगों ने किस भरोसे पर करोड़ों रुपये लगाए और रकम जमा होने के बाद कंपनी से जुड़े लोग कहां चले गए।** इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगा।

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