सेराफिना को प्रायोजन का प्रमाण-पत्र देने वाले प्रोफेसर के नाम से दर्ज खाते में अनिल धोते से ₹1 लाख का हस्तांतरण, लेन-देन की प्रकृति पर उठे सवाल
सुभाष ठाकुर*******
आईआईटी मंडी की ओर से 18 सितंबर 2026 को जारी प्रेस नोट में सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़े कथित निवेश प्रकरण से संस्थान का किसी भी प्रकार का संस्थागत संबंध होने से इनकार किया गया है। संस्थान के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने स्टार्टअप स्थापित करने और इन्क्यूबेशन सहायता प्राप्त करने के उद्देश्य से आईआईटी मंडी से संपर्क किया था तथा सामान्य मार्गदर्शन को किसी प्रकार का संस्थागत समर्थन, प्रायोजन या संरक्षण नहीं माना जा सकता।
आईआईटी द्वारा जारी किया हुआ प्रेस नोट

हालांकि, सामने आए दो आईआईटी मंडी प्रमाण-पत्रों और एक बैंक हस्तांतरण संबंधी दस्तावेज ने मामले में एक नया सवाल खड़ा किया है।
एक ही नाम, दो प्रमाण-पत्र और एक लाख रुपये का लेन-देन उपलब्ध बैंक दस्तावेज में प्राप्तकर्ता का नाम “Venkatesh Chembrolu” दर्ज है तथा उसमें ₹1 लाख के IMPS हस्तांतरण का उल्लेख है। दूसरी ओर, आईआईटी मंडी द्वारा जारी प्रमाण-पत्रों में प्रो. वेंकटेश एच. चेम्ब्रोलु का नाम और हस्ताक्षर दर्ज हैं।
पहले प्रमाण-पत्र में Seraphina Wealth Management को Mind, Brain, and Consciousness Conference-2025 (MBCC 2025) के लिए Partnership & Sponsorship से जोड़ा गया है। प्रमाण-पत्र पर प्रो. अरनव भावसार और प्रो. वेंकटेश एच. चेम्ब्रोलु, Conference Convener के हस्ताक्षर दिखाई देते हैं।

दूसरे प्रमाण-पत्र में भी सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट को MBCC 2025 के Sponsor के रूप में प्रशंसा-पत्र दिया गया है और इस पर भी प्रो. वेंकटेश एच. चेम्ब्रोलु के हस्ताक्षर दर्ज हैं।

इन दस्तावेजों के साथ बैंक रिकॉर्ड में “Venkatesh Chembrolu” नाम के प्राप्तकर्ता को ₹1 लाख के हस्तांतरण का उल्लेख सामने आने से अब इस लेन-देन की वास्तविक प्रकृति और उद्देश्य की जांच का सवाल उठता है।
आखिर एक लाख रुपये किस उद्देश्य से भेजे गए?

उपलब्ध दस्तावेज अकेले यह साबित नहीं करते कि यह राशि सेराफिना, एमबीसीसी-2025 के प्रायोजन अथवा किसी कथित निवेश गतिविधि से संबंधित थी। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण सवालों का सत्यापन आवश्यक हो जाता है।
क्या यह सामान्य व्यक्तिगत लेन-देन था?
क्या यह किसी सेवा अथवा व्यावसायिक भुगतान से संबंधित था?
क्या इसका सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट से कोई संबंध था?
क्या इसका एमबीसीसी-2025 के प्रायोजन से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था?
इन सवालों का उत्तर बैंक रिकॉर्ड, भुगतान के उद्देश्य, संबंधित पक्षों के दस्तावेज और संस्थागत रिकॉर्ड की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
आईआईटी के 18 सितंबर के स्पष्टीकरण के बाद सवाल महत्वपूर्ण
आईआईटी मंडी ने अपने 18 सितंबर के स्पष्टीकरण में कहा है कि संस्थान ने संबंधित निवेश गतिविधियों से कोई वित्तीय लेन-देन नहीं किया, किसी निवेश को अधिकृत नहीं किया और किसी व्यक्ति को संस्थान के नाम पर धन जुटाने की अनुमति नहीं दी।
ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि यदि सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट को आईआईटी मंडी के आधिकारिक सम्मेलन का प्रायोजक बताते हुए प्रमाण-पत्र जारी किए गए थे और उन पर संबंधित प्रोफेसर के हस्ताक्षर हैं, तो उसी नाम से दर्ज बैंक खाते में सामने आए ₹1 लाख के हस्तांतरण की प्रकृति क्या थी।
यह लेन-देन संस्थागत गतिविधि से संबंधित था अथवा पूरी तरह निजी—इसका निर्धारण दस्तावेजी जांच के बाद ही किया जा सकता है।
प्रायोजन से बैंक खाते तक—पूरी कड़ी का सत्यापन जरूरी
निष्पक्ष जांच के लिए कम से कम इन बिंदुओं का सत्यापन आवश्यक दिखाई देता है
– ₹1 लाख का वास्तविक प्रेषक कौन था?
– बैंक रिकॉर्ड में दर्ज Venkatesh Chembrolu की पहचान क्या है?
– क्या यह खाता प्रो. वेंकटेश एच. चेम्ब्रोलु का ही है?
– यदि हां, तो भुगतान किस उद्देश्य से किया गया था?
– भुगतान की तारीख क्या थी?
– भुगतान के समय MBCC-2025 अथवा सेराफिना से संबंधित कौन-सी गतिविधियां चल रही थीं?
– क्या इस भुगतान का सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था?
– क्या आईआईटी मंडी के संबंधित अधिकारियों को इस लेन-देन की जानकारी थी?
– सेराफिना को MBCC-2025 का प्रायोजक दर्शाने वाले प्रमाण-पत्र जारी करने की संस्थागत प्रक्रिया क्या थी?
दस्तावेज सामने आए हैं, निष्कर्ष जांच के बाद ही
फिलहाल उपलब्ध सामग्री से इतना कहा जा सकता है कि बैंक दस्तावेज में “Venkatesh Chembrolu” नाम के प्राप्तकर्ता को ₹1 लाख के हस्तांतरण का उल्लेख है और आईआईटी मंडी के उपलब्ध प्रमाण-पत्रों में प्रो. वेंकटेश एच. चेम्ब्रोलु का नाम और हस्ताक्षर दर्ज हैं।
इन दोनों तथ्यों के बीच समानता अपने आप यह साबित नहीं करती कि उक्त राशि किसी निवेश गतिविधि, सेराफिना के प्रायोजन या किसी गैरकानूनी कार्य से संबंधित थी। इसी तरह केवल इन दस्तावेजों के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता का निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा।
लेकिन आईआईटी मंडी के 18 सितंबर के स्पष्टीकरण के संदर्भ में यह एक ऐसा वित्तीय और दस्तावेजी बिंदु है, जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि और जांच की आवश्यकता है।
अब सवाल केवल यह नहीं है कि अनिल धोते का आईआईटी मंडी से संपर्क किस स्तर तक था। सवाल यह भी है कि सेराफिना के प्रायोजन, एमबीसीसी-2025 से जुड़े प्रमाण-पत्र और सामने आए ₹1 लाख के बैंक हस्तांतरण के बीच वास्तविक संबंध क्या था?
