अमर ज्वाला//मंडी
मंडी के पड्डल मैदान में आयोजित शाख मंडी महोत्सव एवं इंटरनेशनल सिनेमा फेस्टिवल-2026 के तहत सोमवार को सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और बदलते सामाजिक परिवेश से जुड़े विषयों पर आधारित करीब नौ शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। फेस्टिवल का आयोजन 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाने-माने फिल्म निर्देशक सिद्धार्थ कात्यायन रहे। उन्होंने फिल्मकारों और कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लघु फिल्में समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने युवा फिल्मकारों को सार्थक और बेहतर सिनेमा के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
नौ फिल्मों में दिखे समाज के अलग-अलग पहलू
फेस्टिवल में ‘ओने डे लाइफ’, ‘माजरा’, ‘एमबीए’, ‘एक थी पृथ्वी’, ‘डिलेमा’, ‘तय है सुबह का आना’, ‘व्हाट इज लव’, ‘एक चुप्पी की कीमत’ तथा ‘हमारी रामलीला’ फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इन फिल्मों में सामाजिक मुद्दों, मानवीय रिश्तों, भावनाओं, पर्यावरण, पहचान और समाज में व्याप्त विभिन्न परिस्थितियों को अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया।
फिल्मों के प्रदर्शन के बाद उनके विषय, निर्देशन, अभिनय और सामाजिक संदेश को लेकर चर्चा भी हुई। दर्शकों ने फिल्मों की विषय-वस्तु और फिल्मकारों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।
‘हमारी रामलीला’ ने परंपरा और विरासत से जोड़ा
‘हमारी रामलीला’ एक अंतरंग डॉक्यूमेंट्री है, जो रामलीला की सदियों पुरानी परंपरा को उन लोगों के माध्यम से समझने का प्रयास करती है, जो पीढ़ियों से इसे जीवित रखे हुए हैं। फिल्म मंच पर होने वाले अभिनय से आगे बढ़कर कलाकारों की भक्ति, भावनाओं, संघर्षों और व्यक्तिगत यात्राओं को सामने लाती है।
फिल्म यह भी दिखाती है कि रामलीला कई लोगों के लिए महज नाट्य प्रदर्शन या धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समुदाय, विरासत और बचपन की यादों से जुड़ा जीवंत रिश्ता है। बदलती दुनिया में सदियों पुरानी परंपराएं कैसे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखती हैं, फिल्म इसी सवाल को केंद्र में रखती है।
‘एमबीए’ में महानगर में पहचान और पूर्वाग्रह का सवाल
‘एमबीए’ एक ऐसे युवा की कहानी है, जो अपने नाम, पेशे और कुंवारेपन के कारण मुंबई जैसे महानगर में किराए का अपार्टमेंट तलाशते समय अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करता है। फिल्म महानगर में व्यक्ति की पहचान और सामाजिक सोच से जुड़े पहलुओं को सामने रखती है।
‘एक थी पृथ्वी’ में पर्यावरण और मानवता का भविष्य
सतीश सूद द्वारा निर्मित ‘एक थी पृथ्वी’ एक पहाड़ी निवासी और शहरी आगंतुक के बीच टकराव के माध्यम से आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरणीय गिरावट के गंभीर परिणामों को सामने लाती है। फिल्म प्रकृति के साथ मनुष्य के बिगड़ते रिश्ते और मानवता के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। फिल्म का संदेश पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
फिल्मकारों को मिला मंच
कार्यक्रम के निर्देशक रामपाल मलिक हैं। इस अवसर पर अध्यक्ष पुष्पराज ‘पुष्पी’, उपाध्यक्ष राजेश कुमार, जयकिशन ‘जैक’, राजित सिंह कंवर, रूप उपाध्याय, राजेश चौहान, शाल्वी शर्मा, संजय सोनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और कला-संस्कृति से जुड़े लोग मौजूद रहे।
फेस्टिवल की जूरी में अशोक मेहरा, संजीव रतन और रितेश मेहता शामिल रहे। जूरी सदस्यों ने फिल्मों का अवलोकन कर फिल्मकारों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का मंच संचालन कुलदीप गुलेरिया ने किया।
इंटरनेशनल सिनेमा फेस्टिवल-2026 का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में सिनेमा और फिल्म संस्कृति को बढ़ावा देना तथा देशभर के फिल्मकारों को एक मंच उपलब्ध करवाना है। फेस्टिवल के आगामी कार्यक्रमों में भी विभिन्न फिल्मों का प्रदर्शन और फिल्म जगत से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
