द्रंग को पोस्टर नहीं, बुलंद आवाज चाहिए

2027 में टिकट की कसौटी धनबल और राजनीतिक विरासत नहीं, वर्षों की जनसेवा हो

सुभाष ठाकुर*******

हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ने लगी है। सोशल मीडिया पर प्रदेश की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से एआई से तैयार आकर्षक पोस्टर और बड़े-बड़े दावों के साथ नए और पुराने चेहरों के पोस्ट सामने आ रहे हैं। कुछ आशावादी लोग वरिष्ठ नेताओं को पीछे धकेलकर खुद को नया चेहरा साबित करने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि क्षेत्र में ठप पड़े विकास कार्यों और जनता की समस्याओं को लेकर उन्होंने कभी एक शब्द तक नहीं बोला। आखिर कौन नेता है और कौन नहीं, इसका फैसला किसी पोस्टर, सोशल मीडिया या स्वयंभू दावेदारी से नहीं, बल्कि जनता करती है।

सवाल यह है कि जो चेहरे आज पोस्टरों में दिखाई दे रहे हैं, क्या उन्होंने कभी क्षेत्र की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन के सामने अपनी आवाज उठाई है? पिछले पांच-दस वर्षों में वे जनता के किस मुद्दे पर खड़े दिखाई दिए हैं? जनता को यह देखना होगा कि किसने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी और रोजगार की समस्याओं को सरकार तथा प्रशासन के सामने उठाया, किसने बिना किसी पद के जनता की आवाज बनने का साहस किया और किसने केवल चुनाव नजदीक आते ही आर्थिक संसाधनों के सहारे राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई।

राजनीति सेवा का माध्यम है, व्यवसाय बढ़ाने या सत्ता का प्रभाव दिखाने का जरिया नहीं। कुछ लोग कर्मचारियों के तबादले करवाने और अधिकारियों तक अपनी पहुंच को राजनीतिक ताकत समझते हैं। लेकिन कर्मचारी का तबादला करवाना और जनता की किसी समस्या का स्थायी समाधान करवाना दो अलग-अलग बातें हैं। सत्ता का प्रभाव समय के साथ बदलता है, जबकि जनता के बीच वर्षों की सेवा और विश्वास का प्रभाव लंबे समय तक कायम रहता है। कर्मचारियों के तबादलों को लेकर सत्ता के गलियारों में होने वाली चर्चाएं अपनी जगह हैं, लेकिन वास्तविक राजनीतिक क्षमता की पहचान तब होती है, जब व्यक्ति बिना किसी सत्ता के प्रभाव के जनता के लिए खड़ा होता है।

द्रंग विधानसभा क्षेत्र की जनता ने पिछले दो चुनावों में ऐसे नेतृत्व चुना कि एक बार विधायक बना कर दूसरी बार टिकेट तन काटा कि वह कसौटी पर खरा नहीं उतर पाए ,यही हाल एक बार फिर से चर्चा तेज हो चुकी है कि भाजपा द्रंग में ऐसे व्यक्ति को टिकेट देगी जो क्षेत्र की समस्याओं के लिए अपनी बुलंद आवाज बन कर उठाता रहा हो,

पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के लम्बे राजनीतिक कार्यकाल के दौरान उनके राजनीतिक विरोधी भाजपा द्वारा ऐसा प्रचार किया जाता था । कि कहते थे कि 40 वर्षों में पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने क्या किया ? सवाल अब यह है कि क्या अब द्रंग में विकास की जरूरत नहीं ?  क्या सारी सड़कें पक्की हो चुकी है ?  , क्या स्वास्थ्य संस्थानों ,शिक्षकों के सभी पद भरे हुए हैं ? अब  विधायक का टिकेट कटवाने का प्रचार न करके द्रंग का विकास कार्य विधायक से करवाने के लिए आवाज बुलंद करनी चाहिए ।

यह बात सच है कि पूर्व मंत्री की उम्र 2027 के विधानसभा चुनावों के दौरान 82 वर्ष के हो जाएंगे । जैसे कि स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल 2022 में 82 वर्ष की उम्र में चुनाव जीता हुआ है और स्वस्थ मंत्री बने हैं ।

द्रंग में आज जरूरत ऐसे नेतृत्व की है जो राजनीतिक विरासत या धनबल के सहारे नहीं, बल्कि अपने काम और संघर्ष के आधार पर जनता के बीच हमेशा बुलंद आवाज के साथ खड़ा रहा हो। जिसे कृषि और बागवानी की वास्तविक समस्याओं की समझ हो, युवाओं के रोजगार की चिंता हो, शिक्षा और स्वास्थ्य की जमीनी स्थिति का ज्ञान हो तथा केंद्र और राज्य सरकार की विकासात्मक योजनाओं को क्षेत्र तक पहुंचाने की क्षमता हो। सबसे महत्वपूर्ण यह कि ऐसा नेतृत्व सरकार के सामने भी जनता की आवाज उठाने का साहस रखता हो।

द्रंग की पहचान कमांद स्थित आईआईटी जैसे बड़े संस्थान से भी है। इतने बड़े संस्थान की मौजूदगी के बावजूद स्थानीय युवाओं, रोजगार, व्यवसाय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को इसका अपेक्षित लाभ कितना मिला, यह सवाल राजनीतिक नेतृत्व से पूछा जाना चाहिए। संस्थान से जुड़े गंभीर आरोप और विवाद सामने आए हैं तो जनप्रतिनिधियों और भावी उम्मीदवारों का दायित्व बनता है कि वे तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाएं। लेकिन यदि संभावित उम्मीदवारों को अपने ही क्षेत्र में स्थापित इतने महत्वपूर्ण संस्थान से जुड़े मामलों की जानकारी तक नहीं है तो उनसे क्षेत्र के बड़े सवालों पर नेतृत्व की उम्मीद कैसे की जा सकती है? जो लोग आज द्रंग का भविष्य बदलने का दावा कर रहे हैं, जनता को उनसे यह भी पूछना चाहिए कि उन्होंने कल द्रंग के बड़े सवालों पर कितनी आवाज उठाई थी।

एआई से आकर्षक पोस्टर बनाया जा सकता है, किसी चेहरे को नया राजनीतिक रूप दिया जा सकता है और सोशल मीडिया पर माहौल बनाया जा सकता है, लेकिन जनसेवा का पुराना रिकॉर्ड एआई से नहीं बनाया जा सकता। वह रिकॉर्ड जनता के पास है। जनता जानती है कि कौन वर्षों से समस्याओं के बीच खड़ा रहा, किसने सरकारों के सामने क्षेत्र की आवाज उठाई, किसने भ्रष्टाचार या अनियमितताओं पर सवाल उठाए और कौन केवल चुनाव के समय सक्रिय दिखाई देता है।

इसलिए 2027 में द्रंग की जनता को चेहरा नहीं, वर्षों का काम और संघर्ष देखना होगा। राजनीतिक विरासत नहीं, व्यक्तिगत योग्यता देखनी होगी। धनबल नहीं, जनबल देखना होगा। सत्ता के प्रभाव से ज्यादा जनता के बीच बनी विश्वसनीयता को महत्व देना होगा। द्रंग को ऐसा विधायक चाहिए जो विधायक बनने से पहले ही जनता की आवाज रहा हो और पद मिलने के बाद भी जनता की आवाज बना रहे।

आने वाले समय में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर ऐसी रिपोर्टों के माध्यम से भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित सभी राजनीतिक दलों के सामने संभावित चेहरों का जनसेवा, कार्यक्षमता, राजनीतिक सक्रियता और जनसरोकारों के आधार पर रिपोर्ट कार्ड रखना जरूरी होगा। एक तरफ उम्मीदवार की उपलब्धियां और जनता के लिए किए गए कार्य हों तथा दूसरी तरफ उसकी निष्क्रियता, जनसमस्याओं से दूरी और राजनीतिक प्रदर्शन का आकलन हो। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी यह तय करना होगा कि द्रंग को केवल राजनीतिक विरासत, धनबल या सत्ता के प्रभाव वाला चेहरा देना है या फिर ऐसा सेवाभावी और सक्षम नेतृत्व सामने लाना है, जो पार्टी की विचारधारा के साथ-साथ क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को समझे, जनता की आवाज मजबूती से उठाए और समाधान करवाने का साहस रखता हो।

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