₹1.18 करोड़ की निकासी का दावा, सेराफिना मामले में पैसों की नई कड़ियां सामने

चैट में 21 खातों से भुगतान पूरा होने का दावा, उपलब्ध स्क्रीनशॉटों में कम से कम ₹5.30 लाख के अलग-अलग लेन-देन; निवेशकों के लाभ का 10 प्रतिशत इस्कॉन को देने की कथित व्यवस्था पर भी सवाल

सुभाष ठाकुर*******

आईआईटी मंडी कमांद में के परिसर के भीतर और परिसर के बाहर सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़े कथित निवेश प्रकरण में अब ₹1.18 करोड़ की निकासी का दावा सामने आया है। उपलब्ध व्हाट्सऐप चैट में 29 सितंबर 2025 को एक संदेश के माध्यम से ₹1.18 करोड़, ₹20.67 लाख और ₹10.15 लाख, यानी कुल करीब ₹1.48 करोड़ की निकासी तीन चरणों में पूरी होने तथा 21 खातों से भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। फिलहाल चैट में किए गए दावे पर आधारित है जांच एजेंसियों के बाद इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

अमर ज्वाला के पास उपलब्ध बैंक लेन-देन के स्क्रीनशॉटों में भी अलग-अलग व्यक्तियों के खातों में भुगतान दिखाई देते हैं। इनमें 26 सितंबर 2025 को ₹40 हजार, 1 अक्टूबर को ₹3 लाख, 2 अक्टूबर को ₹15 हजार, 3 अक्टूबर को ₹25 हजार, ₹20 हजार और ₹90 हजार, 14 अक्टूबर को ₹10 हजार तथा 4 नवंबर को ₹5 हजार के भुगतान शामिल हैं। इन उपलब्ध स्क्रीनशॉटों की कुल राशि कम से कम ₹5.30 लाख बैठती है।

हालांकि, इन सभी लेन-देन का सीधा संबंध सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट से है, मामले में सामने आए वित्तीय दस्तावेजों के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि सेराफिना से जुड़े प्रमाणित भुगतान के रूप में।

10 प्रतिशत लाभ इस्कॉन को देने की कथित व्यवस्था पर सवाल

मामले में एक अन्य गंभीर सवाल उन जानकारियों से उठता है, जो नाम न बताने की शर्त पर उपलब्ध कराई गई हैं। दावा किया गया है कि कुछ निवेश संबंधी रसीदों या व्यवस्थाओं में निवेशकों को मिलने वाले लाभ का 10 प्रतिशत इस्कॉन से जुड़े खाते में जमा किए जाने की बात थी।

यदि ऐसा कोई पूर्व निर्धारित वित्तीय प्रबंध दस्तावेजों से प्रमाणित होता है तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है कि यह व्यवस्था किसने बनाई, भुगतान किस खाते में होना था, उसका उद्देश्य क्या था और सेराफिना से उसका वास्तविक संबंध क्या था।

उपलब्ध चैट में दान की रसीद तथा 80जी प्रमाणपत्र को लेकर भी बातचीत दिखाई देती है। इसमें नाम, पैन के अनुसार पूरा नाम, पता और पैन नंबर मांगे जाने की बात सामने आती है। हालांकि केवल इस बातचीत के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित रकम सेराफिना निवेश से प्राप्त लाभ थी या उसका भुगतान किसी अन्य उद्देश्य से किया गया था।

मामले में आईआईटी मंडी और सेराफिना के बीच संपर्क को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आईआईटी मंडी की आधिकारिक एमबीसीसी-2025 सामग्री में सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट को सम्मेलन का विशेष भोजन प्रायोजक बताया गया है और कहा गया है कि पूरे आयोजन में भोजन एवं जलपान का प्रायोजन कंपनी ने किया था।

वहीं आईआईटी मंडी ने अपने पक्ष में कहा है कि कथित निवेश गतिविधियों का संस्थान से कोई संस्थागत अथवा वित्तीय संबंध नहीं था और अनिल धोते संस्थान में स्टार्टअप स्थापित करने तथा इनक्यूबेशन संबंधी सहायता के लिए संपर्क में आए थे। संस्थान ने यह भी कहा था कि उसने किसी निवेश अथवा धन-संग्रह को अधिकृत नहीं किया।

दूसरी ओर, सार्वजनिक रिपोर्टों में सेराफिना से जुड़े गौरव अनिल धोते की आईआईटी मंडी में मौजूदगी, कार्यक्रमों में भागीदारी तथा संस्थान से निकटता के आरोपों का उल्लेख किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र जांच पुलिस के स्तर पर चल रही है।

*निदेशक बेहरा और इस्कॉन संबंध भी चर्चा में*

आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा का इस्कॉन और भगवद्गीता से सार्वजनिक रूप से जुड़ाव भी सामने आता रहा है। हाल की सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार वे आईआईटी मंडी में भगवद्गीता से संबंधित पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं तथा इस्कॉन से जुड़े प्रस्तावित भक्तिवेदांत विश्वविद्यालय से भी उनका संबंध बताया गया है।

इस्कॉन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. एल.डी. बेहरा के नाम से समर्थन संबंधी उल्लेख दिखाई देता है। 

ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि आईआईटी मंडी के निदेशक, गौरव अनिल धोते/सेराफिना और इस्कॉन के बीच वास्तविक संपर्क की प्रकृति क्या थी? क्या निवेशकों के लाभ का 10 प्रतिशत इस्कॉन को देने की कोई पूर्व निर्धारित व्यवस्था थी, या यह केवल किसी अलग दान व्यवस्था से संबंधित था?

*अब दस्तावेजों और खातों की जांच महत्वपूर्ण* 

₹1.18 करोड़ की निकासी का चैट दावा, लगभग ₹1.48 करोड़ की कुल निकासी का उल्लेख, अलग-अलग खातों में दिखाई दे रहे भुगतान और 10 प्रतिशत लाभ इस्कॉन को देने के कथित प्रबंध—इन सभी कड़ियों की पुष्टि के लिए संबंधित बैंक खातों, रसीदों, कर दस्तावेजों, निवेश रिकॉर्ड और धन के अंतिम लाभार्थियों की जांच आवश्यक होगी।

क्रम जारी…….आईआईटी के प्रोफेसरों द्वारा चंडीगढ़ में खरीदी संपत्तियाँ तथा हर तीसरे से चौथे माह विदेश दौरा, आईआईटी कमांद के मैस आवंटन, बिना जीएसटी से आवंटित, आईटी के केयर टेकर की भर्ती , जेई की धर्मपत्नी को आवंटित दुकानों इस्कॉन से जुड़े लोगों की नियुक्तियां बड़े स्तर पर चर्चा खुलकर आने लगी सामने । 

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