लॉगिन और ओटीपी की समस्या से बढ़ी चिंता, करोड़ों रुपये की निकासी प्रभावित होने की आशंका; केंद्र सरकार और ईपीएफओ की जवाबदेही पर उठे सवाल
अमर ज्वाला //मंडी
कर्मचारियों की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए जमा होने वाली भविष्य निधि की निकासी में ऑनलाइन तकनीकी समस्याएं परेशानी का कारण बन रही हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पोर्टल पर लॉगिन और ओटीपी संबंधी दिक्कतों को लेकर कर्मचारी परेशान हैं। शिकायत है कि यह समस्या पिछले कई महीनों से बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कर्मचारी अपनी ही मेहनत की कमाई निकालने के लिए कब तक परेशान होते रहेंगे?
भविष्य निधि कर्मचारियों की वर्षों की बचत होती है। बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जरूरतों और आपातकालीन परिस्थितियों में इसी राशि से आर्थिक सहारा मिलता है। लेकिन जब पोर्टल पर लॉगिन नहीं हो पाता, ओटीपी प्राप्त नहीं होता या ऑनलाइन प्रक्रिया बीच में ही अटक जाती है, तो कर्मचारियों के लिए अपने खाते की जानकारी हासिल करना और निकासी संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में ऐसी तकनीकी बाधाएं आवेदन करने या उसकी स्थिति जानने में भी रुकावट बन सकती हैं।
करोड़ों की जमा पूंजी, फिर भी निकासी में बाधा क्यों?
देशभर में करोड़ों कर्मचारी ईपीएफओ की सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था में लंबे समय तक परेशानी बने रहने से बड़ी संख्या में खाताधारकों के प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, तकनीकी समस्याओं के कारण कितने कर्मचारियों की निकासी रुकी है और कितनी राशि प्रभावित हुई है, इसका प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद कर्मचारियों की शिकायतें इस व्यवस्था की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
ईपीएफओ केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि ऑनलाइन सेवाओं में महीनों से परेशानी आ रही है, तो इसे दूर करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं? कर्मचारियों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि समस्या का वास्तविक कारण क्या है और इसका स्थायी समाधान कब तक होगा।
सरकार और ईपीएफओ स्पष्ट करें स्थिति
कर्मचारियों की मांग है कि ईपीएफओ पोर्टल की लॉगिन और ओटीपी संबंधी समस्याओं को तत्काल दूर किया जाए। तकनीकी कारणों से लंबित निकासी आवेदनों की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा प्रभावित खाताधारकों को शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाए। यदि समस्या किसी तकनीकी उन्नयन या सर्वर संबंधी खामी के कारण है, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
कर्मचारियों की भविष्य निधि कोई सरकारी सहायता नहीं, बल्कि उनकी मेहनत से अर्जित बचत है। जरूरत के समय अपनी ही जमा पूंजी तक पहुंचने में उन्हें महीनों तक परेशानी का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और ईपीएफओ इन शिकायतों पर कब गंभीरता से कार्रवाई करते हैं और कर्मचारियों को इस परेशानी से राहत मिलती है या नहीं।
