अमर ज्वाला//कुल्लू
उपायुक्त, जिला कुल्लू डॉ. अमित कुमार शर्मा (IAS) ने आज क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू स्थित जिला प्रारम्भिक हस्तक्षेप केंद्र का दौरा कर केंद्र की कार्यप्रणाली एवं वहां उपलब्ध स्वास्थ्य, चिकित्सा और पुनर्वास सेवाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर डॉ रंजीत ठाकुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), कुल्लू एवं डॉ सपना शर्मा चिकित्सा अधीक्षक (Medical Superintendent), क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू भी उपस्थित रहे।
इस दौरान डॉ श्रुति मोरे भारद्वाज , क्लिनिकल प्रमुख एवं निदेशक, संफिया फ़ाउंडेशन द्वारा उन्हें केंद्र में बच्चों को प्रदान की जा रही विभिन्न विशेषज्ञ सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें फिजियोथेरेपी, स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, विशेष शिक्षा एवं दिव्यांगता से संबंधित बच्चों की शीघ्र पहचान और आवश्यक हस्तक्षेप जैसी सेवाएं शामिल हैं।
उपायुक्त ने केंद्र में संचालित दिव्यांग मित्र केंद्र की गतिविधियों एवं कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। उन्हें अवगत करवाया गया कि इस केंद्र के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों एवं दिव्यांगजनों को UDID कार्ड पंजीकरण, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, दिव्यांग पेंशन, सहारा योजना, बोनाफाइड एवं आय प्रमाण पत्र सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, उन्हें श्रवण संबंधी समस्याओं की पहचान के लिए उपलब्ध BERA (Brainstem Evoked Response Audiometry) जांच सुविधा के महत्व एवं उपयोगिता से अवगत करवाया गया। इस जांच के माध्यम से श्रवण क्षमता से संबंधित समस्याओं की पहचान करने में सहायता मिलती है, जो विशेष रूप से श्रवण दिव्यांगता के आकलन एवं संबंधित प्रमाण पत्र की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्र की गतिविधियों एवं सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने के उपरांत उपायुक्त ने DEIC की कार्यप्रणाली के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की तथा इस प्रकार की पहल को बच्चों के समग्र विकास एवं सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों में विकासात्मक विलंब एवं दिव्यांगता की समय रहते पहचान कर उचित उपचार एवं पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध करवाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि DEIC जैसे प्रभावी मॉडल को प्रदेश के प्रत्येक जिले में विकसित एवं सुदृढ़ किया जाना चाहिए, ताकि जरूरतमंद बच्चों को उनके निकट ही समय पर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
