अमर ज्वाला //मंडी
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्ता की गद्दी पर पहुंचाने के लिए एनपीएसईए कमचारियों की एहम भूमिका रही है । आज उसी कांग्रेस सरकार से एनपीएसईए के पूर्व पदाधिकारियों की नाराजगी सामने आने लगी है। सरकार से दूरियां बनती हुई दिखाई देने लगी है।
एनपीएसईए के पूर्व जिला महासचिव भगत सिंह गुलेरिया ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी उस फरमान को हैरानी जनक बताया है जिसमें यह कहा गया है कि अनुबंध सेवाओं की गणना पेंशनरी लाभों के लिए नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह आदेश उच्चतम न्यायालय के फैसले और प्रदेश सरकार की भावना के विरुद्ध है।
भगत सिंह गुलेरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को ओपीएस जैसा ऐतिहासिक और सबसे बड़ा तोहफा प्रदान किया है, लेकिन कुछ कर्मचारियों को इससे वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे मामले पर समग्र रूप से विचार करें और सभी कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ देने हेतु आवश्यक कार्यवाही करें।
भगत सिंह गुलेरिया ने कहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा इस हेतु सरकारी कर्मचारी की भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम 2024 का हवाला दिया जा रहा है। इस अधिनियम के अनुसार कर्मचारियों को सर्विस बेनिफिट्स जैसे सीनियारिटी, इंक्रीमेंट और प्रमोशन आदि नियमितीकरण के बाद देने की बात कही गई है। उन्होंने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा है कि हिमाचल सरकार बनाम शीला देवी मामले में 7 अगस्त 2023 को अनुबंध सेवाकाल को पेंशनरी बेनिफिटस् देने हेतु गणना करने के निर्णय दिया है। उस निर्णय को प्रदेश सरकार द्वारा 10 जून 2024 को लागू भी कर दिया गया लेकिन अब इस नए फरमान से सभी लाभार्थी परेशान हो गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे मामले पर समग्र रूप से विचार करें और सभी कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ देने हेतु आवश्यक कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत सवा दो साल से पेंशन मिलना शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी हैरानी व्यक्त की कि आदेश केवल शिक्षा विभाग में ही जारी हुआ है।
