अमर ज्वाला //मंडी
आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने एक नए प्रकार की लचीली और टिकाऊ 2डी सामग्री का विकास किया है, जो अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थकेयर उपकरणों के लिए वरदान साबित हो सकती है।
इस शोध में डब्ल्यूएस२-पीडीएमएस कॉम्पोज़िट निर्माण तकनीक विकसित की गई है, जो एक लंबी उम्र वाली और लचीली सामग्री है। यह सामग्री अगली पीढ़ी के वियरेबल गैजेट्स, मोड़ने योग्य स्मार्टफोन और हेल्थ मॉनिटरिंग उपकरणों को शक्ति प्रदान कर सकती है।
इस शोध का नेतृत्व प्रो. विश्वनाथ बालकृष्णन ने किया, साथ में यदु चंद्रन, डॉ. दीपा ठाकुर और अंजलि शर्मा भी शामिल हैं। इस शोध में वॉटर-मीडिएटेड, नॉन-डिस्ट्रक्टिव ट्रांसफर मेथड का उपयोग किया गया, जिससे केमिकल वेपर डिपॉज़िशन (सीवीडी) से तैयार डब्ल्यूएस२ मोनोलेयर को पीडीएमएस की परतों के बीच सुरक्षित रूप से रखा जा सकता है।
इस शोध के परिणाम एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स में प्रकाशित हुए हैं। यह शोध एटॉमिकली थिन मैटेरियल्स में आने वाली मुख्य चुनौती – वायु में उनकी अस्थिरता – को हल करता है।
इस शोध के महत्व के बारे में प्रो. विश्वनाथ बालकृष्णन ने कहा, “यह विकास 2डी मैटेरियल्स से लचीली और वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। परमाणुविक स्तर पर पतली परतों को सुरक्षित रखते हुए उनके ऑप्टिकल और इलेक्ट्रिकल गुणों को बनाए रखना, अगली पीढ़ी के सेंसर, डिस्प्ले और हेल्थ मॉनिटरिंग उपकरणों के लिए स्केलेबल और दीर्घकालिक प्लेटफॉर्म तैयार करता है।”
यह शोध फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स, वियरेबल मेडिकल सेंसर, हल्के सोलर सेल, अगली पीढ़ी के स्ट्रेन सेंसर और ट्यून करने योग्य ऑप्टिकल उपकरणों के निर्माण की मजबूत नींव रखता है। पीडीएमएस बायोकंपैटिबल होने के कारण, यह नैनोकॉम्पोज़िट सीधे मानव शरीर पर लगाए जाने वाले हेल्थ मॉनिटरिंग सेंसर के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
