सुभाष ठाकुर*******
हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के पधर उपमंडल के अंतर्गत दुर्गम क्षेत्र चौहार घाटी में शिक्षा ,स्वास्थ्य और परिवहन की अव्यवस्था ने आम जनता का भविष्य अंधकारमय कर दिया है। घाटी का कोई भी एक स्कूल ऐसा नहीं जहां सभी शिक्षकों से सारे पद भरे हुए हैं।
हिमाचल सरकार शिक्षा विभाग में सुधारीकरण होने का दावा तो कर रही है कि हिमाचल सरकार का शिक्षा विभाग 21वें पायदान से वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 5वें पायदान पर पहुंचा हुआ है । ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में यह हालत बने हैं कि किसी भी स्कूल में शिक्षकों के सभी पद भरे बिना शिक्षा की गुणवत्ता में कैसे सुधार हुआ होगा।
दुर्गम चौहार घाटी के शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के दर्जनों खाली पदों के चलते विद्यार्थियों का भविष्य ग्रहण का शिकार हो रहा है। स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों से विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं होने से उनका भविष्य अंधकार की ओर जा रहा है। वहीं राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने के बयान जारी कर रही है।
चौहार घाटी के सीनियर स्कैंडरी स्कूल रोपा, सीनियर स्कैंडरी स्कूल सरन, सीनियर स्कैंडरी स्कूल कथोग, सीनियर स्कैंडरी स्कूल स्वाड़, सीनियर स्कैंडरी स्कूल सुधार, सीनियर स्कैंडरी स्कूल वर्धान, सीनियर स्कैंडरी स्कूल खल्याहल, और सीनियर स्कैंडरी स्कूल बरोट में शिक्षकों के खाली पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सीनियर स्कैंडरी स्कूल सुधार में प्रधानाचार्य , पॉलिटिकल साइंस, प्रवक्ता इतिहास, प्रवक्ता संस्कृत, प्रवक्ता गणित, शास्त्री ड्राइंग मास्टर पी ई टी के यह पद शिक्षक वर्ग के रिक्त होने से दुर्गम क्षेत्र के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर ग्रहण लगा हुआ है।
इसके साथ साथ गैर शिक्षकों में क्लर्क और चपरासी के पद भी रिक्त चले हुए हैं।

सीनियर स्कैंडरी शिल्हबुधानी स्कूल के प्रधानाचार्य , प्रवक्ता हिंदी ,कंप्यूटर साइंस तथा शारीरिक शिक्षक,
राजकीय उच्च माध्यमिक पाठशाला बल्ह अंडर कॉम्लेक्स रोपा टीजीटी कला और शास्त्री के पद रिक्त चले हुए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने भी चौहार घाटी के स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्य कर्मचारियों और अधिकारियों के बिना संस्थान सफेद हाथियों की तरह चलाए हुए हैं।
चौहार घाटी के सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थान सुधार बिना किसी डॉक्टर बिना किसी स्टाफ नर्स मात्र महिला स्वास्थ्य वर्कर के सहारे चलाया हुआ है । ऐसे ही घाटी के माढ़ उप स्वास्थ्य के केंद्र में ताला लगाना पड़ा है किसी स्वास्थ्य कर्मी से मढ़ में ताला लटकाना पड़ा है । हिमाचल सरकार चौहार घाटी की व्यवस्था परिवर्तन तो नहीं कर पाई बल्कि चौहार घाटी में व्यवस्था अपरिवर्तित जरूर हुई है ।

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के पास परिवहन निगम की बसें भी चौहार घाटी की सड़कों पर दौड़ने वाली अधिकांश बसें बंद करके ग्रामीण क्षेत्र की आम जनता की मुश्किलें बढ़ाई हुई है । एचआरटीसी की बसों के रूट बंद करने से महिलाओं को मिलने वाले बस किराए में 50 फीसदी रियायत न मिलने से निजी बसों के पूरे किराए दे कर या फिर टैक्सी करके मंहगे सफर करने के लिए मजबूत होना पड़ रहा है।
चौहार घाटी की सड़कों पर हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें चला करती थीं, लेकिन कांग्रेस की व्यवस्था परिवर्तन करने आई सरकार के आते ही चौहार घाटी की जनता के साथ सौतेला व्यवहार होने लगा है ।
शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के दर्जन पद रिक्त होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है । वहीं दुर्गम क्षेत्र से अस्पतालों या अन्य किसी कार्य के बसों के सफर को महंगे दामों में करने के लिए मजबूर होना पड़ा है ।
अधिकांश बसें बंद कर दी गई हैं या निजी बस ट्रांसपोर्टरों को बस रूट दे दिए गए हैं। इससे क्षेत्र की जनता को एक स्थान से दूसरे स्थान सफर करना महंगा हो गया है।

चौहार घाटी की जनता राज्य सरकार की उस योजना से भी वंचित हो रही है, जिसमें हिमाचल परिवहन निगम की बसों में महिलाओं का 50 फीसदी किराया माफ होता है। निजी बसों में महिलाओं को यह सुविधा नहीं मिलने से सरकार से मांग की जा रही है कि चौहार घाटी के उन सभी निगम की बसों को फिर से चलाया जाए।
