सुभाष ठाकुर*******
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में चल रही अंदरूनी गुटबाजी और सरकार–संगठन के बीच उभरते मतभेदों के बीच आगामी राज्यसभा चुनाव कांग्रेस आलाकमान के लिए एक अहम राजनीतिक अवसर बनकर सामने आया है। ऐसे में यदि कांग्रेस हिमाचल से वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ठाकुर को राज्यसभा सांसद बनाकर भेजती है, तो न केवल प्रदेश को संसद के उच्च सदन में एक सशक्त और अनुभवी आवाज मिलेगी, बल्कि हिमाचल कांग्रेस में लंबे समय से बिगड़े क्षेत्रीय संतुलन को भी दुरुस्त किया जा सकेगा।
पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह अपने लंबे राजनीतिक अनुभव, मजबूत संगठनात्मक पकड़ और संतुलित नेतृत्व शैली के लिए जाने जाते हैं। वे द्रंग विधानसभा क्षेत्र से आठ बार विधायक रह चुके हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर चुके हैं। इसके अलावा वे दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पदों पर भी रह चुके हैं। यही कारण है कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस का एक निर्विवाद, अनुभवी और सर्वमान्य चेहरा माना जाता है।

गौरतलब है कि अप्रैल माह में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से भाजपा की राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह सीट कांग्रेस के लिए बेहद अहम हो जाती है। बीते अनुभवों को देखें तो पूर्व में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार की जीत से पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार कांग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू किसी भी तरह की चूक से बचते हुए पूरी रणनीति के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
हिमाचल कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ चुकी है। लोक निर्माण मंत्री द्वारा बाहरी राज्यों के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान, विकास कार्यों में “बंदरबांट” जैसे आरोप, मंत्रियों के आपसी विरोधाभासी वक्तव्य और सरकार–संगठन के बीच तालमेल की कमी ने पार्टी को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और शिक्षा मंत्री के हालिया बयानों से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार और संगठन के बीच समन्वय की सख्त जरूरत है।
ऐसे राजनीतिक माहौल में ठाकुर कौल सिंह जैसे वरिष्ठ और संतुलित नेता को राज्यसभा भेजना कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। इससे न केवल संगठन को दिशा मिलेगी, बल्कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को भी राजनीतिक स्थिरता और संतुलन का स्पष्ट संदेश जाएगा।
सबसे अहम पहलू यह है कि कौल सिंह ठाकुर को राज्यसभा भेजने से हिमाचल कांग्रेस का क्षेत्रीय संतुलन भी बेहतर होगा। वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से मुख्यमंत्री आते हैं, शिमला क्षेत्र से चार कैबिनेट मंत्री, पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष और अन्य प्रमुख पदाधिकारी हैं, जबकि कांगड़ा क्षेत्र से सरकार में मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम पद मौजूद हैं। इसके विपरीत मंडी संसदीय क्षेत्र से न तो कोई मंत्री है और न ही पार्टी या सरकार में किसी बड़े पद पर किसी नेता को जिम्मेदारी मिली है।
मंडी संसदीय क्षेत्र प्रदेश का एक बड़ा और राजनीतिक रूप से अहम क्षेत्र है, जहां से अनुभवी और वरिष्ठ नेतृत्व को लंबे समय से उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में राज्यसभा सांसद के रूप में मंडी क्षेत्र से प्रतिनिधित्व न केवल क्षेत्रीय संतुलन के लिए जरूरी है, बल्कि संगठनात्मक मजबूती के लिए भी अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि ठाकुर कौल सिंह ठाकुर की कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से पुरानी नजदीकियां रही हैं और अब वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी के साथ भी उनके संबंध मजबूत हुए हैं। मंडी जिला से कांग्रेस की जिला अध्यक्ष के रूप में चंपा ठाकुर की नियुक्ति को भी इन्हीं राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए राज्यसभा के लिए हिमाचल कांग्रेस से सबसे प्रबल और संतुलित उम्मीदवारी ठाकुर कौल सिंह ठाकुर की मानी जा रही है। यदि कांग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू उनके नाम पर सहमति बनाते हैं, तो यह फैसला न केवल राज्यसभा में हिमाचल की मजबूत आवाज सुनिश्चित करेगा, बल्कि प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम साबित होगा।
