जोगिंदर जिमखाना क्लब की भूमि अर्जन मुआवजा राशि पर विवाद, ₹7.20 करोड़ जारी न करने की मांग

अमर ज्वाला//मंडी

मंडी शहर को जोड़ने वाले सरस्पेंशन ब्रिज (निर्माण वर्ष 2022) की एप्रोच रोड के लिए अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। जोगिंदर जिमखाना क्लब, मंडी की भूमि अर्जन के तहत स्वीकृत कुल राशि ₹8.70 करोड़ से अधिक बताई जा रही है, जिसमें से लगभग ₹7.20 करोड़ क्लब के पक्ष में दर्शाई गई है।

स्वर्गीय राजा अशोकपाल सेन के पुत्र एवं मंडी रियासत के अंतिम शासक राजा जोगिंदर सेन बहादुर के वंशज राजा ओमेश्वर सेन ने इस भूमि पर वंशानुगत स्वामित्व का दावा करते हुए मुआवजा राशि क्लब प्रबंधन को जारी न करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उक्त भूमि एवं क्लब की संपत्तियों पर उनका वैध स्वामित्व है और वर्तमान क्लब प्रबंधन का इस पर कोई अधिकार नहीं बनता।

राजा ओमेश्वर सेन की ओर से उनके अधिवक्ता संजय मंड्याल ने 30 जनवरी 2026 को भूमि अर्जन अधिकारी, एनएचएआई, मंडी/सदर मंडल को कानूनी नोटिस जारी किया है। नोटिस में मुआवजा राशि के वितरण पर तत्काल रोक लगाने, क्लब के वर्तमान प्रबंधन को किसी भी प्रकार का भुगतान न करने तथा विवाद न सुलझने की स्थिति में राशि न्यायालय/एस्क्रो खाते में जमा कराने की मांग की गई है।

नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो स्वामित्व घोषणा, स्थायी निषेधाज्ञा एवं मुआवजा वसूली सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजा ओमेश्वर सेन ने इस संबंध में माननीय लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को भी पत्र भेजकर प्रधान सचिव (लोक निर्माण), उपायुक्त मंडी एवं भूमि अर्जन अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

राजा ओमेश्वर सेन का कहना है कि क्लब की स्थापना वर्ष 1927 में ब्रिटिश रॉयल इंडियन आर्मी के इंटर-सर्विसेज क्लब के रूप में हुई थी और भूमि का मूल स्वामित्व मंडी रियासत के शासकों के पास था। उनके अनुसार किसी भी प्रकार का वैध हस्तांतरण, संशोधन या न्यायिक आदेश न होने के कारण वर्तमान क्लब प्रबंधन मुआवजा राशि प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है।

मामले को लेकर प्रशासनिक एवं कानूनी स्तर पर हलचल तेज हो गई है, वहीं मुआवजा वितरण प्रक्रिया पर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।

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