सुभाष ठाकुर*******
किरतपुर-नेरचौक फोरलेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 मार्च, 2024 को किया गया था। लगभग ₹3,400 करोड़ की लागत से निर्मित, यह परियोजना किरतपुर से नेरचौक (पुंग तक) की दूरी और यात्रा समय को काफी कम करती है, जिससे चंडीगढ़-मनाली का सफर आसान हो गया है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा निर्मित कीरतपुर-नेरचौक एवं कुल्लू-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-1033) को हिमाचल प्रदेश के विकास की रीढ़ बताने वाले दावों की हकीकत मीडिया विजिट में सामने आ गई।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के माध्यम से दिल्ली से शिमला स्थित क्षेत्रीय प्रबंधन कार्यालय द्वारा आयोजित इस विजिट में मंडी, शिमला और बिलासपुर के प्रिंट मीडिया तथा राष्ट्रीय टीवी चैनलों के पत्रकारों ने मौके पर जाकर राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति का निरीक्षण NHAI अधिकारियों के साथ मिलकर किया।

विजिट के दौरान जहां NHAI अधिकारियों ने इसे प्रदेश के लिए “तेज गति से हो रहा विकास” बताया, वहीं जमीनी सच्चाई ने इन दावों की पोल खोल दी। इस निरीक्षण में क्षेत्रीय प्रबंधक कर्नल अजय सिंह और परियोजना निर्देशक वरुण चारी अपने अन्य इंजीनियरों के साथ मौजूद रहे।
*90 डिग्री पहाड़ कटिंग और भूस्खलन पर चुप्पी*

पत्रकारों ने पहाड़ी क्षेत्र में 90 डिग्री तक की गई पहाड़ों की कटिंग पर सीधा सवाल उठाया और कहा कि यही कारण है कि इस पूरे कॉरिडोर में लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे सड़क की सुरक्षा और स्थानीय आबादी दोनों खतरे में हैं। इस अहम सवाल पर NHAI अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए 40 से 45 मीटर भूमि अधिग्रहण की गई है जिससे साथ लगते हुए गांव वासियों की भूमि रखरखाव का भी ध्यान रखा जाता है । सड़क मार्ग के लिए भूमि की कटाई के दौरान पूरे के पूरे गाँव वासियों को वहां से नहीं उजाड़ा जा सकता है । NHAI के अधिकारियों ने कहा कि इसी कारण पहाड़ों की कटिंग इस तरह से की गई है। उन्होंने कहा कि स्लोप और स्टैप कटिंग करते तो भूमि का अत्यधिक अधिग्रहण करना पड़ता और बहुत जगह पूरे के पूरे गाँव भी उजड़ जाते।
ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल


ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल
कीरतपुर से नेरचौक तक के निरीक्षण में सबसे गंभीर स्थिति ड्रेनेज सिस्टम की सामने आई। पत्रकारों ने पाया कि कई स्थानों पर ड्रेनेज पूरी तरह टूटी हुई है, नालियां मलबे से भरी पड़ी हैं, गंदे पानी के साथ प्लास्टिक और कचरा जमा है, बरसात में पानी की निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आई।
NHAI अधिकारियों को चाहिए कि कीरतपुर से कुल्लू मनाली तक का यह राष्ट्रीय राजमार्ग देश-दुनिया के पर्यटकों की आवाजाही का एकमात्र माध्यम है। राष्ट्रीय राजमार्ग की ड्रेनेज व्यवस्था को साफ-सफाई और टूटी हुई ड्रेनेज की मरम्मत पर खास ध्यान देना होगा ताकि देश-दुनिया के पर्यटकों का सफर सुगम हो और वे स्वच्छ वातावरण में अपना सफर तय कर सकें।
करोड़ों की ग्रीन पट्टी, 70–80% पौधे सूखे

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बनाई गई राष्ट्रीय राजमार्ग की ग्रीन पट्टी भी केवल कागजी साबित हुई। निरीक्षण में सामने आया कि कीरतपुर से नेरचौक तक 70 से 80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं या पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, जबकि इस ग्रीन पट्टी पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।
किरतपुर से नेरचौक मंडी तक राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से आवाजाही के लिए खुला हुआ है
किरतपुर से नेरचौक तक सड़क मार्ग कही भी बाधित नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग कही भी उखड़ा हुआ नहीं बल्कि जहां जहां बरसात के दौरान खराब हुआ था पूरी तरह से ठीक कर दिया है जहां भूस्खलन हुआ था वह भी पूरी तरह से NHAI द्वारा दुरुस्त कर दिया है।

