मंडी से राज्यसभा का उम्मीदवार जरूरी: क्षेत्रीय संतुलन से मजबूत होगी कांग्रेस, सरकार की वापसी की संभावना होगी प्रवाल
सुभाष ठाकुर*******
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। 5 मार्च को नॉमिनेशन भरा जाना है और 16 मार्च को राज्यसभा उमीदवार के लिए चुनाव होंगे।
सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या इस बार मंडी को उसका हक मिलेगा? राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि पूर्व मंत्री Thakur Kaul Singh को राज्यसभा भेजा जाता है, तो इससे न केवल सरकार और संगठन का क्षेत्रीय संतुलन मजबूत होगा, बल्कि कांग्रेस की सरकार की दोबारा वापसी की राह भी आसान हो सकती है।
सोशल मीडिया सर्वे में आगे कौल सिंह
हाल ही में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुए अनौपचारिक सर्वे में पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह को सबसे अधिक समर्थन मिलता दिखा है। सर्वे में शामिल लोगों का मानना है कि मंडी जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जिले को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। कौल सिंह का लंबा राजनीतिक अनुभव, संगठन में पकड़ और जनाधार उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है।
क्षेत्रीय संतुलन का बड़ा सवाल
वर्तमान में कांग्रेस सरकार में कांगड़ा, शिमला, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, सोलन और किन्नौर जिलों से मंत्री, बोर्ड-निगमों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कैबिनेट रैंक के साथ जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। सिरमौर से पार्टी ने प्रदेशाध्यक्ष के रूप में Vinay Kumar को कमान सौंप रखी है।
कांगड़ा, जो प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है, वहां से मंत्री और कई कैबिनेट रैंक पदाधिकारी सरकार में शामिल हैं। लेकिन प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला मंडी—राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम होने के बावजूद—न तो सरकार में प्रभावी प्रतिनिधित्व पा सका है और न ही संगठन में उसे अपेक्षित भागीदारी मिली है।
कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है मंडी
मंडी जिला कभी कांग्रेस का मजबूत किला माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां पार्टी का आधार कमजोर हुआ और भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कमजोरी संगठनात्मक उपेक्षा और क्षेत्रीय असंतुलन का परिणाम रही है।
यदि ठाकुर कौल सिंह को राज्यसभा भेजा जाता है, तो यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस मंडी को उसका सम्मान और प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे न केवल मंडी की 10 विधानसभा सीटों पर सकारात्मक असर पड़ेगा, बल्कि पड़ोसी कुल्लू जिले की 4 सीटों पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
रणनीतिक दृष्टि से अहम फैसला
राज्यसभा का यह चयन केवल एक व्यक्ति को संसद भेजने का मामला नहीं होगा, बल्कि यह राजनीतिक संदेश देने का अवसर भी है। मंडी को प्रतिनिधित्व देकर कांग्रेस यह साबित कर सकती है कि वह संतुलित और समावेशी नेतृत्व में विश्वास रखती है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि पार्टी शीर्ष नेतृत्व जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है, तो इसका सीधा लाभ आगामी चुनावों में मिल सकता है। क्षेत्रीय संतुलन मजबूत होने से संगठन में ऊर्जा आएगी, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और सरकार की दोबारा वापसी की संभावनाएं भी प्रबल होंगी।
अब नजरें कांग्रेस आलाकमान पर टिकी हैं—क्या मंडी को उसका राजनीतिक सम्मान मिलेगा? यदि हां, तो यह फैसला प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है
