अमर ज्वाला// शिमला
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में ऑडिशा से आए प्रेस एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने आउटरीच कार्यक्रम के तहत संस्थान का दौरा कर आलू अनुसंधान और विकास की आधुनिक गतिविधियों को नजदीक से देखा। इस दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों ने उन्हें आलू की उन्नत किस्मों, नई तकनीकों और शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि आलू मूल रूप से भारत की फसल नहीं है, बल्कि लगभग 400 वर्ष पहले अंग्रेजों द्वारा देश में लाया गया था। आज यह हमारी खाद्य श्रृंखला का अहम हिस्सा बन चुका है और देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार संस्थान ने अनेक उन्नत किस्मों का विकास किया है और अब ड्रोन व एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।
समाज विज्ञान संभाग के प्रमुख डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि संस्थान किसानों तक नई किस्में और तकनीक पहुंचाने के लिए सेतु का कार्य कर रहा है। वहीं पौध संरक्षण विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव शर्मा ने आलू की सबसे खतरनाक बीमारी लेट ब्लाइट के प्रबंधन के लिए विकसित ‘इंडोब्लाइटकास्ट’ मोबाइल ऐप की जानकारी दी, जिससे किसान पहले ही बीमारी का पूर्वानुमान लगा सकते हैं।
फसल सुधार संभाग के डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि संस्थान अब तक 80 से अधिक उन्नत किस्में विकसित कर चुका है, जबकि डॉ. जगदेव शर्मा ने संतुलित उर्वरक, फसल चक्र और आधुनिक मशीनों के उपयोग पर प्रकाश डाला। पोस्ट हार्वेस्ट विभाग के डॉ. सोम दत्त ने आलू प्रोसेसिंग से जुड़े कार्यों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने भी अपना परिचय देते हुए आउटरीच कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अंत में राजदीप बक्स ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।
