हिमाचल में पहली बार होगा ‘ईशा ग्रामोत्सवम’, 100 से अधिक टीमें लेंगी हिस्सा

भारत के सबसे बड़े ग्रामीण खेल महोत्सव में 1,000 से अधिक खिलाड़ी दिखाएंगे दम, कुल एक करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि

अमर ज्वाला //कुल्लू

भारत का सबसे बड़ा ग्रामीण खेल उत्सव **’ईशा ग्रामोत्सवम’** इस वर्ष पहली बार हिमाचल प्रदेश में आयोजित किया जा रहा है। राज्य में पहली बार हो रहे इस आयोजन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। पहले ही संस्करण में 100 से अधिक टीमों ने पंजीकरण कराया है और 1,000 से अधिक खिलाड़ियों के भाग लेने की संभावना है। इनमें 300 से अधिक महिला खिलाड़ी भी शामिल होंगी।

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु की प्रेरणा से शुरू हुए इस आयोजन का उद्देश्य खेल और संस्कृति के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाना तथा युवाओं और महिलाओं को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच उपलब्ध कराना है। यह प्रतियोगिता विशेष रूप से ग्रामीण नागरिकों के लिए है, जिसमें किसान, दिहाड़ी मजदूर, गृहिणियां और विद्यार्थी भाग ले सकते हैं।

इस वर्ष प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग के लिए वॉलीबॉल तथा महिला वर्ग के लिए थ्रोबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में केवल वही खिलाड़ी भाग ले सकेंगे जिन्होंने राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य या देश का प्रतिनिधित्व नहीं किया हो। सभी खिलाड़ियों का एक ही ग्राम पंचायत का निवासी होना अनिवार्य है। वॉलीबॉल खिलाड़ियों की न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा थ्रोबॉल खिलाड़ियों की न्यूनतम आयु 13 वर्ष निर्धारित की गई है।

1-2 अगस्त को कुल्लू में होंगे क्लस्टर मुकाबले

हिमाचल प्रदेश के क्लस्टर स्तर के मुकाबले 1 और 2 अगस्त को कुल्लू के ढालपुर मैदान में आयोजित होंगे। इसके बाद विजेता टीमें 9 अगस्त को हरियाणा के करनाल में होने वाले डिवीजनल राउंड में भाग लेंगी। सफल टीमें 4 से 6 सितंबर तक तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में आदियोगी की प्रतिमा के समक्ष आयोजित होने वाले ग्रैंड फिनाले में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

65 वर्षीय वंती देवी बनीं प्रेरणा

इस आयोजन से कई प्रेरणादायक कहानियां भी सामने आई हैं। कुल्लू जिले के चचोगा गांव की 65 वर्षीय किसान **वंती देवी** ने उम्र की परवाह किए बिना महिलाओं की थ्रोबॉल टीम बनाकर प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण कराया है। वहीं बेन्ची पंचायत के 53 वर्षीय किसान **प्रेमचंद** न केवल गांव की वॉलीबॉल टीम तैयार कर रहे हैं, बल्कि महिलाओं को भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह पहल ग्रामीण समाज में खेल संस्कृति और महिला भागीदारी को बढ़ावा देने का संदेश दे रही है।

एक करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि

‘ईशा ग्रामोत्सवम’ में कुल एक करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि रखी गई है। क्लस्टर स्तर पर विजेता टीम को 10 हजार रुपये तथा उपविजेता को 7 हजार रुपये मिलेंगे। तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्रमशः 5 हजार और 3 हजार रुपये दिए जाएंगे।

डिवीजनल स्तर पर विजेता टीम को 15 हजार रुपये, उपविजेता को 10 हजार रुपये, तीसरे स्थान पर 6 हजार तथा चौथे स्थान पर 4 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।

ग्रैंड फिनाले में वॉलीबॉल और थ्रोबॉल की विजेता टीमों को 5-5 लाख रुपये, उपविजेता को 3-3 लाख रुपये तथा तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्रमशः 1 लाख और 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। इसके अलावा प्रत्येक राज्य के डिवीजनल राउंड की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी को ग्रैवटॉन ई-बाइक भी प्रदान की जाएगी।

80 हजार से अधिक खिलाड़ी होंगे शामिल

इस वर्ष आयोजित होने वाला ‘ईशा ग्रामोत्सवम’ का 18वां संस्करण देश के 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार 40 हजार से अधिक गांवों की लगभग 7 हजार टीमें और 80 हजार से अधिक खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग लेंगे, जिनमें करीब 15 हजार महिला खिलाड़ी शामिल होंगी। यह प्रतियोगिता ‘फिट इंडिया’ से मान्यता प्राप्त है तथा इसे भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन संगठन (NSPO) के रूप में भी मान्यता दी गई है। वर्ष 2018 में इस पहल को राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

हिमाचल प्रदेश के इच्छुक ग्रामीण खिलाड़ी निःशुल्क पंजीकरण कर प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।

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