आठ माह से कागजों में उलझी वरधान स्वास्थ्य उपकेंद्र की मरम्मत, जर्जर भवन में खतरे के बीच स्वास्थ्य सेवाएं
सुभाष ठाकुर*******
चौहार घाटी में सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारना तो अलग यहां तो बने हुए सरकारी संस्थानों का संचालन और व्यवस्था बदहाली की मिसाल बनती जा रही है। द्रंग के विधायक व पंचायती राज संस्थानों के चुने हुए प्रतिनिधियों को चाहिए अपने क्षेत्र की गंभीर समस्याओं के लिए अधिकारियों की जबावदेही सुनिश्चित करवाये।
चौहार घाटी के वरधान स्वास्थ्य उपकेंद्र के जर्जर भवन की मरम्मत का मामला पिछले करीब आठ माह से विभागीय पत्राचार में उलझा हुआ है। स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर खंड चिकित्सा अधिकारी और जिला स्तर के अधिकारियों तक कई पत्र भेजे जा चुके हैं, वहीं लोक निर्माण विभाग ने भी भवन की मरम्मत के लिए करीब 9.87 लाख रुपये का अनुमान तैयार कर लिया है। इसके बावजूद अभी तक मरम्मत का काम धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है।
दस्तावेजों के अनुसार मामले की शुरुआत 03 मार्च 2026 को हुई, जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पत्राचार किया गया। इसके बाद 08 अप्रैल 2026 को कार्यालय पत्र क्रमांक 1531 के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाया गया। इन पत्रों में वरधान स्वास्थ्य उपकेंद्र के भवन की खराब स्थिति और आवश्यक मरम्मत का मुद्दा उठाया गया।
इसके बाद 01 जुलाई 2026 को खंड चिकित्सा अधिकारी, पधर की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मंडी को पत्र भेजा गया। इसमें पूर्व में भेजे गए कार्यालय पत्र क्रमांक 1033 दिनांक 03 मार्च 2026 और क्रमांक 1531 दिनांक 08 अप्रैल 2026 का हवाला देते हुए वरधान स्वास्थ्य उपकेंद्र की मरम्मत के लिए तैयार किए गए अनुमान के आधार पर बजट उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया।
पत्र में बताया गया कि भवन की मरम्मत के लिए कुल 9,87,210 रुपये का अनुमान तैयार किया गया है। इसमें से 7,01,310 रुपये का बजट उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया, जबकि 2,85,900 रुपये की राशि लोक निर्माण विभाग के पास पहले से उपलब्ध होने की जानकारी दी गई।
इससे पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी ने भी खंड चिकित्सा अधिकारी, पधर को पत्र भेजकर भवन की स्थिति से अवगत करवाया था। पत्र में भवन को अत्यंत जर्जर एवं क्षतिग्रस्त बताते हुए दीवारों, फर्श और शौचालय ब्लॉक की खराब स्थिति का उल्लेख किया गया। स्वास्थ्य कर्मी ने भवन की स्थिति को कर्मचारियों और मरीजों के लिए जोखिमपूर्ण बताते हुए तत्काल निरीक्षण, भवन को असुरक्षित घोषित करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अथवा आवश्यक मरम्मत करवाने की मांग की थी।
मामले में लोक निर्माण विभाग, मंडी मंडल नंबर-1, पधर की ओर से भी भवन का निरीक्षण कर मरम्मत एवं रखरखाव के लिए 9,87,210 रुपये का अनुमान तैयार किया गया। अनुमान में प्री-प्रिंटेड शीट रूफ लगाने, आरसीसी स्लैब हटाने, प्लास्टर, पेंटिंग सहित अन्य आवश्यक कार्य शामिल किए गए हैं। PWD की रिपोर्ट के अनुसार भवन की खराब स्थिति को देखते हुए निरीक्षण के बाद यह अनुमान तैयार कर आवश्यक स्वीकृति और धनराशि उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया के लिए आगे भेजा गया।
मामला 3 मार्च, 08 अप्रैल और 01 जुलाई 2026 को हुए विभागीय पत्राचार के साथ स्वास्थ्य कर्मी, खंड चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और लोक निर्माण विभाग स्तर पर मामला आगे बढ़ा, लेकिन करीब आठ माह बीतने के बाद भी मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है।
बरसात के दौरान भवन की जर्जर हालत के कारण स्वास्थ्य कर्मियों और मरीजों की सुरक्षा को लेकर खतरा जताया गया था। अब बरसात का मौसम गुजर चुका है और अक्टूबर से बरोट क्षेत्र में सर्दियों का मौसम शुरू होने वाला है। चौहार घाटी में सर्दियों के दौरान मौसम और आवागमन की परिस्थितियां कठिन हो जाती हैं। ऐसे में समय रहते भवन की मरम्मत न होने पर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के साथ मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
