अमर ज्वाला//मंडी
मंडी के पड्डल मैदान में चल रहे सोसायटी फॉर हिमाचल आर्ट एंड कल्चर द्वारा प्रस्तुत शाख मंडी उत्सव एवं कुल्लू मनाली इंटरनेशनल सिनेमा फेस्टिवल का दूसरा दिन भी दर्शकों के लिए मनोरंजन और सिनेमा के नए अनुभव लेकर आया। फेस्टिवल में प्रदर्शित लघु फिल्म ‘ट्रैपिडो’ ने खौफ और रहस्य के बीच बुनी अपनी कहानी से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
फिल्म की शुरुआत एक लड़की से होती है, जो देर रात ट्रेन के खाली कंपार्टमेंट में सफर कर रही है। सफर के दौरान मोबाइल पर दिल्ली में चलती गाड़ी में लड़की के साथ गैंगरेप की खबर देखकर वह सहम जाती है। इसके बाद घर तक पहुंचने का उसका सफर लगातार बढ़ते डर और आशंकाओं के बीच गुजरता है।
देर रात ट्रेन एक सुनसान स्टेशन पर रुकती है। स्टेशन पर पसरे सन्नाटे के बीच लड़की ट्रैपिडो बुक करती है। उसे लेने एक स्कूटर सवार युवक पहुंचता है। पहले से डरी हुई लड़की को वह युवक संदिग्ध लगता है, लेकिन घर पहुंचने के लिए वह उसके साथ स्कूटर पर बैठ जाती है।
कुछ दूर आगे सड़क पर एक बाइक सवार युवक मृत अवस्था में पड़ा दिखाई देता है। यह दृश्य देखते ही स्कूटर सवार युवक वाहन रोक देता है। इसके बाद कहानी अचानक नया मोड़ लेती है और लड़की के सामने छिपा रहस्य खुलने लगता है। उसे स्कूटर सवार की असलियत का पता चलता है और वह उस पर जोरदार प्रहार करती है। इसी बीच पुलिस भी मौके पर पहुंच जाती है और मामले की जांच शुरू करती है।
जांच के दौरान सामने आता है कि असल ट्रैपिडो बाइकर की हत्या करने वाला वही स्कूटर सवार युवक है, जिस पर लड़की ने भरोसा किया था। इस खुलासे के साथ फिल्म का रहस्य अपने अंजाम तक पहुंचता है।
विग्नेश शिंदे द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस लघु फिल्म में अनुश्री शुक्ला, हार्दिक ठक्कर, प्रिंस अली सिद्दीकी और यशुवेद सिंह ने प्रमुख भूमिकाओं को जीवंत किया। फिल्म ने भय, संदेह और रहस्य को एक साथ पिरोकर दर्शकों के सामने एक प्रभावशाली कहानी प्रस्तुत की।
