भावी पीढ़ियों के लिए भारत की समृद्ध विरासत के संरक्षण का किया आह्वान
अमर ज्वाला//शिमला
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने रविवार को कांगड़ा स्थित ऐतिहासिक मसरूर रॉक-कट मंदिर का दौरा किया तथा इसकी वास्तु कला, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता में गहरी रुचि दिखाई।
राज्यपाल को इस दौरान मंदिर परिसर के इतिहास, इसकी वास्तु विशेषताओं, निर्माण शैली तथा संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। एक विशाल चट्टान को काटकर निर्मित मसरूर मंदिर परिसर प्राचीन भारतीय नागर वास्तुकला का एक अद्भुत एवं उत्कृष्ट उदाहरण है।
राज्यपाल को प्राकृतिक क्षति तथा विशेष रूप से वर्ष 1905 में कांगड़ा क्षेत्र में आए विनाशकारी भूकंप के कारण मंदिर परिसर को हुए नुकसान के बारे में भी अवगत करवाया गया। भूकंप के दौरान इस ऐतिहासिक परिसर के कई शिखर, स्तंभ तथा मूर्तिकला के विभिन्न हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे।
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण देश की सभ्यतागत पहचान को सुरक्षित रखने तथा इस गौरवशाली विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भारत की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन तथा व्यापक पहचान को बढ़ावा देने के लिए विशेष बल दे रही है।
राज्यपाल ने कहा कि विरासत का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया, ताकि उनकी ऐतिहासिक एवं वास्तुकला विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत की विरासत हमारी सभ्यतागत यात्रा का प्रतीक है तथा इसके संरक्षण से जुड़ी पहल विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़नी चाहिए।
