फाउंडेशन एवं फाउंडेशन द्वारा संचालित प्रारम्भिक हस्तक्षेप केन्द्र , क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू का किया शैक्षणिक भ्रमण
अमर ज्वाला//शिमला
महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम, केरल के मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) के विद्यार्थियों ने आज सांफिया फाउंडेशन तथा फाउंडेशन द्वारा संचालित जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC), क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू का शैक्षणिक भ्रमण किया।
यह भ्रमण विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय अवलोकन भ्रमण का हिस्सा था। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री हरिशंकर एम.पी. एवं सुश्री शॉनली के.जी. भी विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को देशभर में कार्यरत प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों एवं सामाजिक सेवा संस्थानों की कार्यप्रणाली, संगठनात्मक संरचना, व्यावसायिक गतिविधियों तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में अपनाई जा रही नवाचारपूर्ण पहलों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने तथा उनके व्यावसायिक कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस दौरान डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज, क्लिनिकल प्रमुख, सांफिया फाउंडेशन ने विद्यार्थियों को केंद्र की कार्यप्रणाली एवं विभिन्न सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बच्चों में विकासात्मक विलंब एवं दिव्यांगता की समय रहते पहचान, प्रारंभिक हस्तक्षेप तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास में विभिन्न उपचारात्मक सेवाओं एवं थैरेपी के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं, डॉ. रेखा ठाकुर, प्रभारी, जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC), कुल्लू ने स्वास्थ्य एवं पुनर्वास के क्षेत्र में सामाजिक कार्य की महत्वपूर्ण भूमिका, लाभार्थियों एवं उनके परिवारों को उपलब्ध करवाई जाने वाली सहायता तथा सामाजिक समावेशन के महत्व के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने सांफिया फाउंडेशन की एक महत्वपूर्ण पहल ‘दिव्यांग मित्र केंद्र’ के कार्यों से भी विद्यार्थियों को अवगत करवाया। इस केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजनों, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों एवं उनके परिवारों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र, दिव्यांग पेंशन, विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं अन्य पात्रता-आधारित सुविधाओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण, मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है।
इस शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं, प्रारंभिक हस्तक्षेप, पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा एवं दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। साथ ही, उन्हें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों एवं दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण, सामाजिक समावेशन तथा उनके बेहतर भविष्य के लिए किए जा रहे प्रयासों को समझने का अवसर मिला।
