हिमाचल में शुरू हुई सेल्फ जियो-टैगिंग सुविधा, आवास की अगली किस्त जारी करवाने की प्रक्रिया होगी आसान
अमर ज्वाला //मंडी
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के लाभार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। अब योजना के तहत स्वीकृत मकानों का निर्माण करवा रहे लाभार्थी अपने मोबाइल फोन से ही निर्माणाधीन मकानों की जियो-टैगिंग स्वयं कर सकेंगे। हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए सेल्फ जियो-टैगिंग सुविधा शुरू कर दी है। इससे लाभार्थियों को मकान निर्माण के विभिन्न चरणों की जानकारी अपलोड करवाने के लिए विभागीय कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार लाभार्थी आवास ऐप (Awaas App) के माध्यम से अपने निर्माणाधीन मकानों की जियो-टैगिंग कर सकेंगे। पहले यह प्रक्रिया विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों द्वारा पूरी की जाती थी। इसके बाद ही पात्र लाभार्थियों की अगली किस्त जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। अब नई सुविधा के तहत लाभार्थी स्वयं मकान निर्माण के विभिन्न चरणों की तस्वीरें और संबंधित विवरण ऐप पर अपलोड कर सकेंगे।
हालांकि, लाभार्थियों द्वारा की गई जियो-टैगिंग का सत्यापन और अनुमोदन संबंधित विकास खंड के अधिकारियों द्वारा किया जाना अनिवार्य होगा। विभागीय अधिकारियों की मंजूरी के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।
लाभार्थियों को आवास ऐप में लॉगिन करने के लिए चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें पीएमएवाई-जी पंजीकरण आईडी, योजना पोर्टल पर पंजीकृत मोबाइल नंबर, आधार आधारित लॉगिन और मनरेगा जॉब कार्ड शामिल हैं। सभी विकल्पों में ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा। यदि किसी लाभार्थी ने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है तो वह संबंधित विकास खंड कार्यालय में जाकर योजना पोर्टल पर नया मोबाइल नंबर अपडेट करवा सकता है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेल्फ जियो-टैगिंग की सुविधा फिलहाल वैकल्पिक रखी गई है। यानी जो लाभार्थी स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से जियो-टैगिंग नहीं कर पाएंगे, उनके मकानों की जियो-टैगिंग पहले की तरह विभागीय क्षेत्रीय कर्मचारियों द्वारा भी की जाती रहेगी।
ग्रामीण विकास विभाग ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नई सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा लाभार्थियों को ऐप के इस्तेमाल के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का मानना है कि इस पहल से मकान निर्माण की प्रगति की जानकारी समय पर पोर्टल पर उपलब्ध होगी और पात्र लाभार्थियों की किस्तों के प्रसंस्करण में तेजी आएगी।
