संसारी-किलाड़-थिरोट-तांदी सड़क के सुधार एवं विस्तारीकरण कार्य के लिए जन सुनवाई जारी

संसारी–किलाड़–थिरोट–तांदी सड़क के सुधार एवं विस्तारीकरण कार्य से पूर्व भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिकार अधिनियम 2013 तथा हिमाचल प्रदेश भूमि अर्जन पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन नियम 2015 के अनुरूप तैयार किए गए ड्राफ्ट योजना पर विमर्श तथा प्रभावितों के सुझावों को सम्मिलित करने के उद्देश्य से आज वन विश्राम गृह जाहलमा में जहालमा, जुण्डा,मूरिंग और थिरोट पंचायत के जनप्राधिनिधियों, सड़क निर्माण से प्रभावित होने वाले परिवारों की समस्याओं के लिए जन सुनवाई का आयोजन किया गया। इस जन सुनवाई की अध्यक्षता उपमण्डलाधिकारी (ना.) उदयपुर एवं भू-अर्जन अधिकारी अलीशा चौहान ने की। आयोजन में प्रभावित पंचायतों के ग्रामवासी, विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधि, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और संबंधित विभागों के अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

जन सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने सड़क निर्माण प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण से संबंधित कई गंभीर विषयों को प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों की मुख्य चिंता सिंचाई व्यवस्था और प्राकृतिक स्रोतों की सुरक्षित रख-रखाव को लेकर रही। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कुल्ह और खेतों तक जाने वाले जलस्रोत प्रभावित न हों। इस पर बीआरओ के अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि निर्माण कार्य के दौरान सिंचाई की कुलहों सुरक्षित रखा जाएगा तथा किसानों की सुविधा के लिए सिंचाई की अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं को भी ढूंढा जाएगा ।

भूस्खलन और मिट्टी कटाव की समस्या को लेकर भी ग्रामीणों ने गहरी चिंता प्रकट की। उनका कहना था कि अक्सर सड़क निर्माण उपरांत प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन, ढलानों का खिसकना और कृषि योग्य भूमि का नुकसान जैसी कठिनाइयां सामने आती हैं, जिनका स्थायी समाधान आवश्यक है। इसके अतिरिक्त रिहायशी इलाकों में मकानों आपदा के समय हर समय खतरा बना रहता है तथा हाल में आई आपदाओं में जिन भी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के कार्य हुए हैं वहां पर इसका ज़्यादा प्रभाव देखने को मिला है ऐसे में जहाँ भी इस प्रकार की संभावना रहती है वहाँ तुरंत सुरक्षा दीवार आदि लगायी जाए जिससे लोगों के घरों को नुक़सान ना हो ।इस संबंध में प्रशासन और बीआरओ ने प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण करने और समस्याग्रस्त स्थलों की सभी आपत्तियों एवं चिंताओं को दूर करने का आश्वासन दिया।

ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे और सर्कल रेट्स के बारे में भी अपनी चिंता व्यक्त की और उन्होंने कहा कि केलांग की दर के आधार पर सर्कल रेट्स प्रस्तावित किए जाएं। इस पर अलीशा चौहान ने कहा कि प्रशासन ने केलांग की तर्ज पर ही सर्कल रेट्स को सरकार को प्रस्तावित किया है ।

ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी कि यदि निर्माण कार्य में मौजूदा लिंक सड़कों की कटिंग करनी पड़े तो उन्हें पुनः निर्मित किया जाए। इस पर बीआरओ ने आश्वस्त किया कि प्रभावित संपर्क मार्गों को तुरंत प्रभाव से ठीक किया जाएगा।इसके अतिरिक्त इस परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले सभी प्रभावितों, जनप्रतिनिधियों संबंधित विभागों और बीआरओ की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण किया जाएगा और इसमें सभी पहलुओं पर विचार करने एवं सभी शंकाओं को दूर करने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा इसके अतिरिक्त जाहलमा,उदयपुर और मडग्रां के रिहायशी इलाकों में छेड़ छाड़ नहीं की जाएगी ।इस जन सुनवाई में नायव तहसीलदार उदयपुर राम दयाल ,सीमा सड़क संगठन के अधिकारी संबंधित विभागों के अधिकारी ग्राम पंचायत जहालमा,जुण्डा,मूरिंग एवं थिरोट के प्रधान तथा प्रभावित विशेष रूप से उपस्थित रहे ।

 

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