विकसित भारत@2047 सम्मेलन के तीसरे दिन एआई, विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ व्यापक मंथन

अमर ज्वाला// शिमला

करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सह विकास कार्यक्रम विकसित भारत@2047: सतत विकास एवं नैतिक सुशासन हेतु बहुविषयक अनुसंधान के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण के तीसरे दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), विज्ञान, नवाचार, जैव विविधता संरक्षण तथा भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विविध विषयों पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सम्मेलन संयोजक एवं स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की डीन डॉ. प्रतिभा शर्मा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों, नवाचार तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय को समझने का अवसर प्रदान करते हैं और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में डॉ. अशोक शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एवं आईटी विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय ने एआई-पावर्ड आयुर्वेदिक प्रकृति प्रिडिक्शन यूजिंग मशीन लर्निंग विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के माध्यम से आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।

इसके पश्चात पूर्व ग्रुप सीटीओ, लेखक एवं वर्तमान प्रबंध निदेशक, आईसीआईसीआई स्किलिंग एंड अपटैलेंट प्लेटफॉर्म के कमलजीत कुमार शर्मा ने विकसित भारत@2047 में वैश्विक ज्ञान नेतृत्व के रूप में भारत” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं को कौशल विकास, नवाचार और भारतीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए ज्ञान-आधारित राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के एक अन्य विशेषज्ञ वक्ता आर. अंकुर भारती, सिक्योरिटी ऑपरेशंस इंजीनियर, एक अमेरिकी आधारित क्रिप्टो ब्लॉकचेन कंपनी से, ने ऑनलाइन माध्यम से “स्मार्ट सोसाइटी के लिए एआई” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है।

वहीं, स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज द्वारा आयोजित सत्रों में विज्ञान एवं अनुसंधान के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। डॉ. राकेश कुमार दरोच ने जैव विविधता संरक्षण एवं दुर्लभ, संकटग्रस्त तथा विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. अभिषेक गुलेरिया ने आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में गणित की भूमिका को स्पष्ट किया, जबकि प्रो. के. एल. वर्मा ने गणित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर प्रकाश डाला। प्रो. सुवर्चा चौहान ने प्राणायाम और न्यूरोसाइंस के एकीकरण पर व्याख्यान देते हुए मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।

सम्मेलन के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। शोध विषयों में जैव विविधता, औषधीय पौधे, सतत कृषि, जलवायु परिवर्तन, मशीन लर्निंग, अपशिष्ट जल उपचार तथा उन्नत क्रियात्मक पदार्थ प्रमुख रहे। हिमालयी जैव विविधता, हिमाचल प्रदेश की औषधीय वनस्पतियों, जैव बायोएथेनॉल उत्पादन तथा पर्यावरण-अनुकूल नैनोमैटेरियल्स से जुड़े शोधों ने विशेष आकर्षण प्राप्त किया।

सम्मेलन में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच हुए संवाद ने ज्ञान के आदान-प्रदान, नवाचार और बहुविषयक अनुसंधान को नई दिशा प्रदान की। कार्यक्रम ने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव, सामूहिक छायाचित्र एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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