अधिकारियों के कार्यकाय में फोन घुमाने को मजबूर चौहार घाटी के गैस उपभोक्ता

सुभाष ठाकुर*******

चौहार घाटी की बथेरी पंचायत सहित कई दुर्गम क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को रसोई गैस आपूर्ति में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि शिकायत दर्ज करवाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिल रहा, बल्कि एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास भेजा जा रहा है।

बथेरी पंचायत के एक उपभोक्ता योगेश ठाकुर ने बताया कि लगभग एक माह पहले गैस की गाड़ी क्षेत्र में पहुंची थी, लेकिन सभी उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पाए। उनका कहना है कि गैस एजेंसी द्वारा डीएसी नंबर जनरेट कर दिया गया, लेकिन सिलेंडर बाद में देने का आश्वासन दिया गया। करीब 25 दिन बीत जाने के बाद भी गैस की आपूर्ति नहीं हो सकी।

उपभोक्ता ने इस संबंध में जिला प्रशासन, अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। उनका आरोप है कि हर कार्यालय से उन्हें किसी अन्य अधिकारी से संपर्क करने के लिए कहा गया, लेकिन समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उपभोक्ताओं का कहना है कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बार-बार फोन करना और अधिकारियों के बीच भटकना परेशानी को और बढ़ा देता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि चौहार घाटी जैसे दूरदराज क्षेत्रों में अधिकारियों द्वारा आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। उनका कहना है कि यदि समय पर रसोई गैस जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं होगी तो लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

इस संबंध में जब राव गैस एजेंसी के संचालक रोहित राव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गत दिवस बथेरी क्षेत्र में गैस की गाड़ी भेजी गई थी, लेकिन कुछ उपभोक्ताओं तक आपूर्ति नहीं पहुंच पाई। उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसे उपभोक्ताओं के लिए शनिवार को पुनः गैस की गाड़ी भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक माह की 15 तारीख को निर्धारित गैस वितरण कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेगा।

रोहित राव ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से गैस आपूर्ति में जो समस्याएं सामने आ रही थीं, उनमें अब सुधार हो रहा है और व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। उनके अनुसार आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति संबंधी किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

हालांकि, स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। प्रशासन और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो तथा दुर्गम क्षेत्रों के लोगों को कार्यालयों और अधिकारियों के बीच भटकने के लिए मजबूर न होना पड़े।

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