देव श्री हुरंग नारायण का त्रैमासिक भ्रमण 24 नम्बर से शुरू, 27 नम्बर को देवता पोशाकोट मंदिर में होगा भव्य देव मिलन

सुभाष ठाकुर*******

चौहार घाटी के आराध्य देवता श्री हुरंग नारायण 24 नवंबर 2025 को  अपने मंदिर हुरंग गांव के अपने भंडार से मंदिर में तैयारी करके लम्बे समय के लिए भ्रमण ( हारीफेर) के लिए निकलेंगे।

चौहार घाटी को रियासतकाल से राजस्व रिकॉर्ड में चार गढ़ों में के नाम से इतिहास में दर्ज किया हुआ है।  जिसमें सबसे बड़ा अमरगढ़ , हस्तपुर, देवगढ़, कोटगढ के नाम से राजस्व रिकॉर्ड तथा देव समाज में भी इन गढ़ों का महत्व रहता है।

देवता श्री हुरंग नारायण इस भ्रमण के दौरान अमरगढ़ को छोड़ कर अन्य तीनों गढ़ों का भ्रमण करेंगे तथा उसके साथ ऊहल नदी को पार करने के बाद  इलाका हाराबाग, रूहाडा और कुफरी के लिए निकलेंगे।

देवता श्री हुरंग नारायण अपने दर्जनों देवलुओं और गुर राम चंद ठाकुर, पुजारी राजू राम, माता जोगनी का गुर बीर सिंह ठाकुर, पुजारी, भंडारी, भाट्टू, महल इत्यादि सभी देवता के साथ पहले दिन अपने मंदिर हुरंग गांव से ग्रामण गांव पहुंचेंगे।

देव श्री हुरंग नारायण का यह लम्बा भ्रमण अपने अनुयायियों की मनोकामनाओं के पूर्ण होने के बाद देवता का लम्बा इंतजार रहता है और देवता के अनुयायियों के घर पहुंचने पर प्रतिभोज का जगह जगह आयोजन निरंतर चला रहता हैं।

देव श्री हुरंग नारायण से की हुई मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त द्वारा खुशी से देवता के नाम भक्त एक प्रीतिभोज के आयोजन किया गया जिस दौरान गुर पुजारी प्रीतिभोज ग्रहण करते हुए ।
देव श्री हुरंग नारायण से की हुई मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त द्वारा खुशी से देवता के नाम भक्त एक प्रीतिभोज के आयोजन किया गया जिस दौरान गुर पुजारी प्रीतिभोज ग्रहण करते हुए ।

देवता के साथ चलने वाले देवलुओं तथा करदार, भंडारी, पुजारी, गुर तथा अन्य कुछ विशेष लोगों की चलने और रहने की अपनी ही अलग व्यवस्था रहती है वह किसी के बैड, या अन्य बिस्तर पर न सोएंगे और न ही बैठते है। अपने साथ सारा उठाने बैठने और सोने के सामन की व्यवस्था रखना देवता की प्राचीन परम्परा रहती है।

ग्रामण से देवता श्री हुरंग नारायण 25 दुगानधार 26 धर्मेहड पहुंचेंगे जिसके साथ हस्तपुर से देवगढ़ में 27 नम्बर को देव पोशाकोट मंदिर में भव्य देव मिलन होगा जिसे देखने के लिए सैकड़ों लोग वहां पर अपनी हाजरी भरेंगे।

यह देव मेल स्थानीय लोगों का एक आस्था का केंद्र रहा है। देवता की मेल हर पांच साल बाद पहाड़ी बजीर देव पोशाकोट मंदिर में तमाम प्राचीन वाद्ययंत्रों की धुन से समूचा देवगढ़, हस्तपुर और कूटगढ़ गूंज उठेगा। यह परम्परा सदियों से देव संस्कृति अनुसार होती आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *