दमदमा पैलेस की दूसरी मंज़िल से हुई पुष्पवर्षा
सुभाष ठाकुर*******
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले में इस वर्ष एक अनोखा और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिसके लिए मंडी राजमहल तथा दमदमा पैलेस के मालिक राजा ओमैश्वर सिंह सेन के साथ चौहार घाटी के आराध्य देवता श्री हुरंग नारायण की कुछ एहम जानकारी को सांझा किया और उन्होंने भी इस बात को माना। जब मंडी रियासत के राजा साहिब सेन की रानी प्रकाश देई ने देवता श्री हुरंग नारायण से पुत्र प्राप्ति की मनत सन् 1554 में की और कुछ 1955 में रानी प्रकाश देई को पुत्र प्राप्ति हुई से जुड़ी हुई जानकारी सांझा करी । उसके उपरांत राजा ओमेश्वर सिंह सेन से पुष्प पंखुड़ियों को दमदमा पैलेस की दूसरी मंज़िल से पुष्प वर्षा करने की अनुमति ले कर चौहार घाटी के देवताओं का स्वागत किया।
चौहार घाटी के आराध्य देवता श्री हुरंग नारायण, देवता घड़ौनी नारायण, पहाड़ी वजीर के नाम से प्रसिद्ध देवता पशाकोट तथा देवता पेखरू गहरी सहित अन्य देवताओं के मंडी पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।

विशेष बात यह रही कि मंडी में पहली बार राजमहल के दमदमा पैलेस, जहां माधोराय विराजमान हैं, उसकी दूसरी मंज़िल के बाहरी तल किनारे से चौहार घाटी के देवताओं पर जोरदार पुष्प पंखुड़ियों की वर्षा कर स्वागत किया गया। यह आयोजन प्रेस क्लब मंडी के अध्यक्ष एवं चौहार घाटी के स्थायी निवासी द्वारा विशेष रूप से करवाया गया, जिसने इस स्वागत को ऐतिहासिक बना दिया।

यूं तो श्री हुरंग नारायण की पैदल यात्रा के दौरान श्रद्धालु मार्ग में जगह-जगह देव रथ पर पुष्प पंखुड़ियां अर्पित कर स्वागत करते हैं, लेकिन राजमहल की दूसरी मंज़िल से एक साथ घाटी के सभी देवताओं पर पुष्पवर्षा किए जाने का यह पहला अवसर रहा।
देव आस्था और परंपरा से जुड़े इस अनूठे आयोजन ने महाशिवरात्रि मेले की गरिमा को और भी बढ़ा दिया तथा श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का संचार किया।
