अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि की पहली जलेब यात्रा के बाद छाई मायूसी

देवताओं के हर्जाने और बजंतरियों के मानदेय पर घोषणा नहीं, कर्मचारियों को वेतन-पेंशन जारी रखने का आश्वासन

अमर ज्वाला//मंडी

अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत ऐतिहासिक जलेब यात्रा दोपहर दो बजे पारंपरिक धूमधाम के साथ निकाली गई। जलेब में सिराज के देवताओं ने रास्ते से चलने के लिए विरोध किया और वह कुछ देवता अपने उसी रास्ते पर निकले जो कॉलेज गेट से होकर जलेब की यात्रा पूर्ण की जाती थी। देवताओं की वीडियो वायरल हो रही है और देवता के साथ चल रहे एक वीडियो बनाने वाले शख्स को ध्यान से सुना जाए तो वह सर्वदेवता कमेटी के प्रधान के पीछे चलते हुए उन्हें कुछ बोलते हुए सुने जा सकते हैं जिससे देवताओं की नाराजगी को समझा जा सकता है।

जलेब के समापन अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को उपायुक्त अपूर्व देवगण तथा मेला कमेटी के अध्यक्ष चंद्र शेखर ने उन्हें शाल पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर समानित किया।

उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान देव समाज और बजंतरियों  में मायूसी देखी गई।  देवताओं के हर्जाने तथा बजंतरियों के मानदेय को लेकर किसी प्रकार की नई घोषणा नहीं की गई, हर वर्ष की भांति सभी ने यही सोचा और समझा हुआ होता है कि जैसे लंबे समय से  घोषणाएं होती रही इस बार भी लोगों को यही लग रहा था कि उपमुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री ने देवताओं तथा बजंत्रियों के हर्जाने व मानदेय की घोषणा करने के लिए जरूर कुछ सुझाव दिया होगा। लेकिन ऐसा मुख्यमंत्री ने नहीं किया , यही कारण देखा गया कि उपमुख्यमंत्री ने भी अपनी ओर से कोई घोषणा नहीं करके देवी देवताओं का हर्जाना और के वजंतरियों मानदेय को लेकर उन्होंने अपने संबोधन में नाम तक नहीं लिया।

 इस मुद्दे पर स्पष्ट घोषणा न होने से संबंधित वर्गों में निराशा का माहौल रहा और देवता समाज में त्वरित चर्चा शुरू हो चुकी थी।

बल्कि अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों के वेतन और पुरानी पेंशन को बंद नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की भ्रांतियों पर ध्यान न दिया जाए।

वहीं, सदर के विधायक अनिल शर्मा जलेब यात्रा में शामिल नहीं हुए, क्योंकि आज से विधानसभा सदन भी शुरू हुआ है ।

अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की पहली जलेब यात्रा जहां परंपरागत आस्था और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई, वहीं कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर घोषणा न होने से कार्यक्रम के बाद मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली।

 

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