सुभाष ठाकुर*******
जिला मंडी के दुर्गम क्षेत्र चौहार घाटी की धमचयान पंचायत निवासी भीखम राम ने शुक्रवार को मंडी पत्रकार कक्ष में मीडिया के समक्ष अपनी व्यथा रखी। वह अपनी 10 वर्षीय 100 प्रतिशत दिव्यांग बेटी ममता ठाकुर को साथ लेकर पहुंचे, जो न बोल पाती है और न ही सुन सकती है। एक पिता की बेबसी और उम्मीद दोनों उस समय साफ झलक रही थीं।
भीखम राम ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। उन्होंने कहा कि उनके पास महज दो बीघा भूमि है ,जिस पर 12 माह फसल की पैदावार वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार मुश्किल रहती है। यदि उनका चयन आईआरडीपी में हो जाता है, तो उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता और अनुदान का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत उनकी बेटी के उपचार में इस्तेमाल होने वाली महंगी मशीनें और श्रवण यंत्र सस्ती दरों पर या अनुदान के माध्यम से उपलब्ध हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि विशेष सहायक उपकरणों की कीमत लाखों रुपये में है, जिसे वह स्वयं वहन करने में असमर्थ हैं। उनका कहना है कि आईआरडीपी में चयन होने से उनकी बेटी के इलाज और जरूरी मशीनों की व्यवस्था संभव हो सकेगी, जिससे वह दूसरों की आवाज सुन और समझ पाएगी और सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ा सकेगी।
भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व उनकी तीन वर्षीय एक अन्य बेटी का अचानक निधन हो गया था। इस दुखद घटना के बाद परिवार पहले ही मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
भीखम राम ने यह भी आरोप लगाया कि कई पंचायतों में ऐसे लोगों का चयन आईआरडीपी में किया गया है, जिनके पास पक्के मकान और पर्याप्त आय के संसाधन हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि आईआरडीपी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तथा खंड विकास अधिकारी द्वारा उनके मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए।
अंत में उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से मानवीय आधार पर त्वरित कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि एक पिता के रूप में वह अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें न्याय की उम्मीद है।
