राज्यसभा के लिए सबसे सशक्त चेहरा: ठाकुर कौल सिंह की वरिष्ठता और अनुभव की अनदेखी क्यों ?

अमर ज्वाला // शिमला 

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जब भी शुचिता, संसदीय ज्ञान और जमीनी पकड़ की बात आती है, तो एक नाम सबसे ऊपर उभरकर सामने आता है— ठाकुर कौल सिंह। प्रदेश कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार कौल सिंह न केवल आठ बार के विधायक रहे हैं, बल्कि हिमाचल विधानसभा के गरिमामयी अध्यक्ष (स्पीकर) के रूप में भी उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, जबकि कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और अनुभवी आवाजों की जरूरत है, ठाकुर कौल सिंह राज्यसभा के लिए सबसे उपयुक्त और ‘लीगल ब्रेन’ वाले उम्मीदवार प्रतीत होते हैं।

संसदीय ज्ञान और ‘लीगल ब्रेन’ का बेजोड़ संगम

ठाकुर कौल सिंह केवल एक जननेता नहीं हैं, बल्कि उनके पास कानून और संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ है। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी उनके निष्पक्ष और सटीक निर्णयों के लिए याद किया जाता है। राज्यसभा, जिसे ‘बड़ों का सदन’ कहा जाता है, वहां ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता होती है जो जटिल कानूनी बारीकियों को समझ सके और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर पार्टी का पक्ष मजबूती से रख सके। कौल सिंह का ‘लीगल ब्रेन’ ऊपरी सदन में कांग्रेस के लिए एक बड़ी संपत्ति साबित हो सकता है।

पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा और वरिष्ठता

कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के पाला बदलने के दौर में भी ठाकुर कौल सिंह चट्टान की तरह पार्टी के साथ खड़े रहे हैं। वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष (HPCC Chief) भी रहे हैं और संगठन की रग-रग से वाकिफ हैं। उनकी वरिष्ठता का सम्मान करना न केवल मंडी जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं में एक सकारात्मक संदेश देगा। यदि कांग्रेस आलाकमान वास्तव में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करना चाहता है, तो उसे ऐसे नेताओं को तरजीह देनी होगी जिन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी की विचारधारा को सींचने में लगा दिया।

राज्यसभा नामांकन: वक्त की जरूरत

अक्सर देखा गया है कि राज्यसभा के लिए ऐसे चेहरों को चुना जाता है जिनका जमीन से जुड़ाव कम होता है। लेकिन कौल सिंह के मामले में स्थिति अलग है। उनके पास प्रशासनिक अनुभव (मंत्री के रूप में) और विधायी अनुभव (स्पीकर के रूप में) का वो दुर्लभ मेल है, जो बहुत कम नेताओं के पास होता है। हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए उनका नामांकन न केवल प्रदेश के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि संसद में कांग्रेस के बौद्धिक स्तर को भी नई ऊंचाई देगा।

हिमाचल कांग्रेस में इस समय कई गुट और कई दावेदार हो सकते हैं, लेकिन जब बात योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता की आती है, तो ठाकुर कौल सिंह का कोई विकल्प नजर नहीं आता। बाकी तमाम चर्चाओं और क्षेत्रीय समीकरणों से ऊपर उठकर, अगर कांग्रेस नेतृत्व ‘मेरिट’ और ‘पार्टी की मजबूती’ को आधार बनाता है, तो ठाकुर कौल सिंह को राज्यसभा भेजना सबसे बुद्धिमानी भरा निर्णय होगा। अब गेंद कांग्रेस की टॉप लीडरशिप के पाले में है— क्या वे इस ‘लीगल दिग्गज’ के अनुभव का लाभ उठाएंगे या एक सुनहरा अवसर गंवा देंगे ।

राज्यसभा के लिए ठाकुर कौल सिंह: 2027 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का ‘बूस्टर डोज’

हिमाचल प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले ठाकुर कौल सिंह की राज्यसभा में दावेदारी अब केवल एक नामांकन की बात नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकती है। हिमाचल की सियासी फिजाओं में यह स्पष्ट है कि यदि कांग्रेस आलाकमान दूरदर्शिता दिखाते हुए कौल सिंह को उच्च सदन भेजता है, तो यह पार्टी के लिए एक अजेय ‘बूस्टर डोज’ का काम करेगा।

2027 की चुनावी राह होगी आसान

हिमाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस के लिए राह उतनी सरल नहीं होगी, जितनी दिखती है। ऐसे में ठाकुर कौल सिंह जैसे कद्दावर और अनुभवी चेहरे को राज्यसभा का सम्मान देना पूरे प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल को सातवें आसमान पर ले जाएगा। उनकी वरिष्ठता को सम्मान मिलने से पार्टी के भीतर असंतोष खत्म होगा और एकजुटता आएगी।

मंडी से शिमला तक: व्यापक राजनीतिक प्रभाव

ठाकुर कौल सिंह को राज्यसभा भेजने का सीधा सकारात्मक असर हिमाचल के महत्वपूर्ण जिलों के समीकरणों पर पड़ेगा ।

मंडी और कुल्लू का गढ़: मंडी ठाकुर कौल सिंह का गृह जिला है। पिछले चुनावों में मंडी में कांग्रेस को जो क्षति हुई, उसकी भरपाई कौल सिंह को राज्यसभा भेजकर की जा सकती है। इससे मंडी और कुल्लू की सीटों पर कांग्रेस फिर से अपनी बादशाहत कायम कर पाएगी।

कांगड़ा और हमीरपुर: एक अनुभवी राजपूत चेहरे और ‘लीगल ब्रेन’ के रूप में कौल सिंह की स्वीकार्यता कांगड़ा और हमीरपुर जैसे जिलों में बहुत अधिक है। उनका कद और अनुभव इन जिलों के वोटरों को कांग्रेस की ओर खींचने में चुंबकीय प्रभाव डालेगा।

बिलासपुर और शिमला: शिमला संसदीय क्षेत्र और बिलासपुर में भी उनके समर्थकों की एक बड़ी फौज है। एक पूर्व स्पीकर और वरिष्ठ मंत्री के रूप में उनकी साफ-सुथरी छवि इन क्षेत्रों में पार्टी के लिए निर्णायक बढ़त दिलाने में सक्षम है।

कांग्रेस की सबसे बड़ी ‘एसेट’ (Asset)

ठाकुर कौल सिंह कांग्रेस के लिए एक ऐसी संपत्ति (Asset) हैं, जिनके पास संसदीय नियमों का विशाल ज्ञान और जमीनी पकड़ का अद्भुत मेल है। संसद में उनकी गर्जना न केवल केंद्र सरकार को घेरने में काम आएगी, बल्कि हिमाचल की जनता को यह संदेश भी देगी कि कांग्रेस अपने निष्ठावान और विद्वान नेताओं की कद्र करना जानती है।

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