सुभाष ठाकुर*******
मंडी की अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले का शुभारंभ से लेकर समापन तक समग्र रूप से व्यवस्थाएं बेहतर रहीं। कानून व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा देव परंपराओं के निर्वहन को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय दिखाई दिया। विशेष रूप से सांस्कृतिक संध्या में इस बार हिमाचली कलाकारों को प्राथमिकता दी गई, जिसकी सराहना स्थानीय लोगों ने की। जिसमें देवी देवताओं के लिए पकौड़ा शैली टेंटों में मेला ग्राउंड की पौड़ियों पर लाईन बिठाया गया । श्रद्धालुओं को चलाने के लिए खुली जगह रखी है थी ताकि श्रद्धालुओं को सभी देवी देवताओं के एक लाईन से दर्शन किये जा सकें।

उपायुक्त कार्यालय से सेरी मंच तक निकाली गई सांस्कृतिक यात्रा में 12 विदेशी सांस्कृतिक दलों सहित कुल 32 दलों ने भाग लिया। देश-विदेश के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों और मंडी की पारंपरिक झलक ने मेले की गरिमा को और बढ़ाया।

हालांकि इस बार एक अलग तस्वीर भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू राज्यपाल अभिभाषण के कारण मेले के शुभारंभ में उपस्थित नहीं हो सके। कई वर्षों बाद ऐसा अवसर आया जब मंडी महाशिवरात्रि मेले के उद्घाटन में मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए।


पहली शाही जलेब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मुख्य अतिथि रहे। अपने संबोधन में वे कोई विशेष घोषणा नहीं कर सके। देवताओं के हर्जाने और बजंतरियों के मानदेय में वृद्धि न होने से देवलुओं में मायूसी देखी गई।

दूसरी शाही जलेब में विधानसभा अध्यक्ष मुख्य अतिथि रहे, जबकि तीसरी और अंतिम जलेब में महामहिम राज्यपाल शामिल हुए। अंतिम जलेब के दौरान व्यवस्थाओं में कुछ अव्यवस्था भी देखने को मिली—जलेब के बीच-बीच में टूटने और वाहनों की आवाजाही ने आयोजन पर प्रश्न खड़े किए।


इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के समर्थन में कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा नारेबाजी की गई। आमजनता के एक वर्ग ने धार्मिक आयोजन में राजनीतिक नारे लगाए जाने पर आपत्ति भी जताई। बताया जा रहा है कि स्वयं नेता प्रतिपक्ष ने कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया, लेकिन नारेबाजी जारी रही।

वहीं, पहली जलेब में जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित क्रम के अनुसार छह सांस्कृतिक दलों को सबसे आगे चलना था, जिसकी जिम्मेदारी जिला भाषा अधिकारी को सौंपी गई थी। परंतु चार दल जलेब में शामिल नहीं हुए। इसको लेकर सदर एसडीएम द्वारा जवाबदेही तय करने का प्रयास किया गया, जिससे अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ गया।

दूसरे दिन सेरी मंच पर भी आपसी तकरार सामने आई, जिसका वीडियो किसी ने वायरल कर दिया। सूत्रों के अनुसार, यह तकरार ड्यूटी और जिम्मेदारी के बंटवारे को लेकर पहले से चली आ रही असहमति का परिणाम थी।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर मेले की सांस्कृतिक भव्यता और व्यवस्थाओं की सराहना हुई, वहीं राजनीतिक नारेबाजी और प्रशासनिक तकरार ने आयोजन को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
