बिना क्रमांक की रसीद पर ₹50 वसूली, ठेकेदार बोला— टेंडर की शर्तों पर कर रहे कार्य

सेवानिवृत्त अधिकारी बी.आर. कौंडल की गाड़ी से कटी रसीद आई सामने;

ठेकेदार ने कहा—अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से झेलनी पड़ती है धमकियां

अमर ज्वाला // मंडी

लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक के आपातकालीन क्षेत्र की पार्किंग व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। यहां पार्किंग के नाम पर बिना क्रमांक (सीरियल नंबर) वाली रसीदें काटकर ₹50 वसूले जाने का मामला सामने आया है, जिससे वसूली की पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो गया है।

मामला तब सामने आया जब सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी बी.आर. कौंडल की गाड़ी की पार्किंग के दौरान उन्हें दी गई रसीद की जांच की गई। रसीद पर ₹50 शुल्क अंकित है और इसे 24 घंटे के लिए मान्य बताया गया है, लेकिन इस पर कोई क्रमांक संख्या दर्ज नहीं है। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि ऐसी कितनी रसीदें छपीं और रोजाना कितनी वसूली हो रही है।

कौंडल के अनुसार, उन्होंने पहले ही रसीद को ध्यान से देख लिया था और उसमें क्रमांक न होने सहित कई खामियां पाई थीं। इसलिए उन्होंने रसीद वापस नहीं दी और इसे प्रमाण के तौर पर मीडिया के साथ साझा करते हुए पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी।

रसीद में यह भी शर्त लिखी हुई है कि वाहन को पार्क करना मालिक की अपनी जिम्मेदारी पर होगा तथा किसी प्रकार की चोरी या नुकसान के लिए पार्किंग संचालक जिम्मेदार नहीं होंगे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ना कितना उचित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों से रोजाना बड़ी संख्या में वाहनों की पार्किंग के नाम पर शुल्क लिया जाता है। यदि रसीदों पर क्रमांक ही नहीं होगा तो वास्तविक आय और वसूली का रिकॉर्ड रखना मुश्किल हो जाएगा, जिससे गड़बड़ी की आशंका भी बढ़ जाती है।

ठेकेदार ने कहा—अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से झेलनी पड़ती है धमकियां

इसी बीच पार्किंग ठेकेदार चेतन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की आपातकालीन पार्किंग का ऑनलाइन टेंडर तीन वर्षों के लिए हुआ है, उनका टेंडर 2027 मैच तक है। जिसे उन्होंने 23 लाख रुपये में लिया है। उनके अनुसार टेंडर की शर्तों के तहत उन्हें सभी टैक्स सहित हर महीने लगभग करीब 2 लाख 19 हजार रुपये अस्पताल प्रशासन को जमा करने पड़ते हैं।

ठेकेदार का कहना है कि इस टेंडर से उन्हें खास लाभ नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में आने वाले कई अधिकारी और प्रभावशाली लोग पार्किंग शुल्क को लेकर कर्मचारियों को धमकाते हैं। कई बार कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की जाती है और पार्किंग में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ा गया है, लेकिन इस मामले में प्रशासन की ओर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा। उन्होंने यह भी कहा है कि पुलिस चौकी में कई बार लिखित शिकायत कर चुके हैं लेकिन प्रभावशाली लोगों द्वारा उनकी शिकायतों को दबाया जाता है। उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।

रसीद में क्रमांक संख्या न होने के सवाल पर ठेकेदार ने कहा कि रसीदों में क्रमांक दर्ज किया जाता है, लेकिन संभव है कि किसी रसीद बुक में गलती से क्रमांक डालना छूट गया हो। उनका कहना है कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा इसमें हेराफेरी की जाती है तो उसका नुकसान ठेकेदार को ही होगा, क्योंकि सरकार और प्रशासन को तय शर्तों के अनुसार पूरी राशि जमा की जा रही है।

फिलहाल इस पूरे मामले के सामने आने के बाद लोगों की निगाहें मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर टिकी हैं कि वह पार्किंग व्यवस्था और रसीद प्रणाली की जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित करता है या नहीं।

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