क्या विभागीय मिलीभगत से हो रहा नियमों का उल्लंघन?
अमर ज्वाला// मंडी
शहर में पिछले कई वर्षों से सरकारी संपत्तियों का खुलेआम दुरुपयोग देखने को मिल रहा है। सरकारी दीवारों, बिजली के खम्भों और टेलीकॉम पोलों पर निजी संस्थानों के बोर्ड और फ्लैक्स इस तरह टांगे जा रहे हैं मानो इन खम्भों को किसी ने लीज पर ले रखा हो।
शहर के कई इलाकों में कोचिंग संस्थानों, निजी अस्पतालों, स्कूलों और अन्य संस्थाओं के विज्ञापन बड़े पैमाने पर बिजली के खम्भों और सरकारी दीवारों पर लगे दिखाई दे रहे हैं। इससे न सिर्फ शहर की सौंदर्यता प्रभावित हो रही है बल्कि सरकारी नियमों की भी खुलेआम अनदेखी हो रही है। सबसे अधिक मंडी शहर से कटौला सड़क के दाईं और वाई ओर यह दृश्य अधिकांश विद्युत और टेलीफोन के खम्भो पर देखा जा सकता है। यह क्षेत्र कुछ नगर निगम के वार्ड संख्या 1 में पड़ता है, बाकी पंचायतों का क्षेत्र होने का लाभ यह निजी संस्थानों द्वारा अपने प्रचार का क्षेत्र बनाया हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर निगम प्रशासन विज्ञापन के लिए निर्धारित शुल्क लेकर ही स्थान उपलब्ध कराता है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बिजली के खम्भों पर लगाए गए इन फ्लैक्स और बोर्ड के लिए नगर निगम या विद्युत विभाग द्वारा कोई शुल्क वसूला जा रहा है या फिर यह सब बिना अनुमति के ही लगाया जा रहा है।
नियमों के बावजूद धड़ल्ले से लग रहे फ्लैक्स










बॉक्स : विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता अरुण शर्मा बोले सख्ती से मामला करेंगे दर्ज
विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता अरुण शर्मा से जब मामले पर पूछा गया कि विद्युत खम्भो पर फ्लैक्स टांगने की निजी संस्थानों को कब अनुमति दी हुई है ? उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्युत खम्भो पर निजी संस्थानों द्वारा अपने विज्ञापन के फ्लैक्स गैरकानूनी टांगे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्होंने भी टांगे हुए हैं उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। किसी को विद्युत खम्बो पर कोई भी प्रचार सामग्री लगाने की किसी को अनुमति नहीं दी जाती है । अरुण शर्मा ने कहा कि विद्युत विभाग की हजारों किलोमीटर लाइनें बिछाई हुई है किसी को भी विद्युत खम्भो पर इस तरह का प्रचार करना गैर कानूनी है सख्ती से कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी दीवार, सार्वजनिक संपत्ति, बिजली या टेलीकॉम खम्भों पर बिना अनुमति के पोस्टर, बैनर या फ्लैक्स लगाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह ऐसे विज्ञापन खुलेआम लगे हुए हैं।
यदि इन संस्थानों ने संबंधित विभागों से अनुमति नहीं ली है तो सवाल यह भी उठता है कि आखिर विभागीय अधिकारी और कर्मचारी अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे। लोगों का आरोप है कि कहीं न कहीं विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही यह अवैध विज्ञापन खुलेआम जारी हैं।
उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अनदेखी
कई मामलों में उच्च न्यायालयों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी दीवारों, बिजली के खम्भों और सार्वजनिक संपत्तियों को विज्ञापन का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। अदालतों ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक संपत्तियों को अवैध पोस्टर, बैनर और फ्लैक्स से मुक्त रखा जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके बावजूद शहर में जिस तरह से सरकारी संपत्तियों पर विज्ञापन सामग्री टांगी जा रही है, उससे यह साफ प्रतीत होता है कि न्यायालय के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है।
क्या इन फ्लैक्स और बोर्ड के लिए नगर निगम या विद्युत विभाग ने कोई अनुमति दी है?
यदि अनुमति नहीं दी गई है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी संपत्तियों को विज्ञापन स्थल बनाया जा रहा है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल अभियान चलाकर ऐसे सभी अवैध फ्लैक्स और बोर्ड हटाने चाहिए और जिम्मेदार संस्थानों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
