अमर ज्वाला// बरोट
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की दुर्गम लेकिन बेहद खूबसूरत चौहार घाटी में स्थित बरोट वैली प्रकृति, आस्था और समृद्ध जैव-विविधता का अनोखा संगम प्रस्तुत करती है। चौहार घाटी के इस बरोट क्षेत्र में देश दुनिया के पर्यटकों की आवाजाही 12 महीने होती है लेकिन जितनी खूबसूरती कुदरत ने इस घाटी को प्रदान की हुई है उसके मुताबिक राज्य सरकार की लापरवाही के कारण क्षेत्र को पर्यटकों के लिए विकसित नहीं किया गया । यहां एक मात्र सड़क वह भी बरसात हो या सर्दियों में कई दिनों तक भूस्खलन होने से बंद रहती है।
पर्यटकों के लिए आवाजाही की सड़क सुविधा बेहद नाममात्र शुरू से रही है । क्षेत्र के लोगों को भुवुजीत टनल निर्माण से खुशी की किरण दिखाई देने लगी है।
चौहार घाटी सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह क्षेत्र विभिन्न प्रकार की दुर्लभ और गुणकारी जड़ी-बूटियों का खजाना है, जिनका उपयोग प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में किया जाता रहा है। यहां पाई जाने वाली अनेक औषधीय वनस्पतियां शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पुरानी बीमारियों के उपचार और स्वास्थ्य संवर्धन में अहम भूमिका निभाती हैं। स्थानीय लोग आज भी इन जड़ी-बूटियों के पारंपरिक ज्ञान को संजोए हुए हैं और उनका उपयोग दैनिक जीवन में करते हैं।
इसी प्राकृतिक और औषधीय समृद्धि के कारण चौहार घाटी न केवल पर्यटन के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि शोधकर्ताओं और आयुर्वेद विशेषज्ञों के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनती जा रही है।
