थलटूखोड़ स्कूल में प्रधानाचार्य सहित कई पद रिक्त, अभिभावकों और एसएमसी ने जताई नाराजगी**
अमर ज्वाला // पधर
मुख्यमंत्री और मंत्रियों तक पहुंच किसी से छिपी नहीं है। बड़े-बड़े फूलों के गुलदस्तों के साथ खिंचवाई गई तस्वीरें और नेताओं के साथ मुलाकातों के वीडियो लगभग हर सप्ताह सोशल मीडिया पर खूब वायरल किए जाते हैं। विकास और जनसेवा के दावों से जनता को लुभाने की कोशिश भी की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
घाटी के लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के नेताओं ने अपनी राजनीतिक पहुंच का उपयोग जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान के बजाय केवल राजनीतिक लाभ तक सीमित रखा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों में वर्षों से खाली पड़े पदों को भरवाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। कई स्कूल और कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य संस्थानों में भी कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षकों के बिना विद्यार्थियों की शिक्षा कैसे पूरी होगी? उनके मानसिक, बौद्धिक और व्यक्तित्व विकास की नींव ही शिक्षक होते हैं। यदि विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होंगे तो विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होना स्वाभाविक है।
इसी कड़ी में चौहार घाटी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थलटूखोड़ की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्य जगदीश कुमार ने बताया कि विद्यालय में लंबे समय से प्रधानाचार्य, अंग्रेजी प्रवक्ता, जीवविज्ञान प्रवक्ता तथा आईटी शिक्षक के पद रिक्त पड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि इन पदों को भरने के लिए शिक्षा मंत्री को दो बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक सरकार और प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
जगदीश कुमार ने कहा कि लगातार मांगों के बावजूद रिक्त पद न भरना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने सरकार से शीघ्र आवश्यक नियुक्तियां करने की मांग की है।
वहीं स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विद्यालय के रिक्त पद नहीं भरे गए तो चौहार घाटी की जनता मंडी में शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय और उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी। लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।
