अमर ज्वाला//मंडी,
मंडी जिले के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के कार्यक्रम के दौरान रविवार को उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला देउरी के नवनिर्मित भवन का प्रस्तावित लोकार्पण अंतिम समय में टालना पड़ा। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से आवश्यक अनुमति न मिलने के कारण उद्घाटन नहीं हो सका।
शिक्षा विभाग के उपनिदेशक यशवीर धीमान ने भी स्वीकार किया कि अंतिम समय में लोकार्पण रुकने से असहज स्थिति बन गई। उन्होंने कहा कि विभाग कई दिनों से कार्यक्रम की तैयारियों में जुटा हुआ था और उद्घाटन की पूरी व्यवस्था कर ली गई थी।
शिक्षा मंत्री के आधिकारिक दौरा कार्यक्रम में देउरी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भवन का लोकार्पण शामिल था। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री के साथ पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह, पूर्व संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, कांग्रेस के जिला व ब्लॉक पदाधिकारी, विभागीय अधिकारी, कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब शिक्षा मंत्री लोकार्पण के लिए पहुंचे तो वहां उद्घाटन शिलापट्ट ही मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों का दावा है कि शिलापट्ट एक दिन पहले तक लगा हुआ था, लेकिन कार्यक्रम से पहले उसे हटा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। संबंधित स्वीकृति प्राप्त न होने के कारण कार्यक्रम रोक दिया गया। हालांकि इस संबंध में सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
घटना के बाद दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे लोगों में नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना था कि यदि सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई थीं तो उद्घाटन कार्यक्रम निर्धारित ही नहीं किया जाना चाहिए था। लोगों का आरोप है कि विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा स्थानीय जनता और विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि भवन का विधिवत लोकार्पण न होने से उसे अभी तक शिक्षा विभाग को औपचारिक रूप से हस्तांतरित नहीं किया जा सका।
इस घटनाक्रम के बाद सरकार के भीतर समन्वय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शिक्षा मंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के बावजूद अंतिम समय में लोकार्पण क्यों रोकना पड़ा।
चर्चाओं का बाजार गर्म
घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं इस भवन के लोकार्पण को भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के लिए सुरक्षित तो नहीं रखा गया। कुछ लोग कयास लगा रहे हैं कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की संभावित उपस्थिति को देखते हुए कार्यक्रम टाला गया हो। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले द्रंग विधानसभा क्षेत्र में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से कटिंडी–झटिंगरी सड़क विस्तारीकरण परियोजना के शिलान्यास को लेकर भी मुख्यमंत्री कार्यालय की अनुमति संबंधी विवाद सामने आ चुका है। उस मामले में भी अनुमति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि देउरी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के नए भवन का लोकार्पण आखिर कब होगा और इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार अथवा मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है।
