ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों से सजते हैं शहरों के बाजार, गेंदे के फूलों से लेकर मिट्टी के दीयों तक स्वदेशी वस्तुओं की रहती है मांग
अमर ज्वाला//मंडी
दीपावली का त्योहार केवल रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यापारियों और मेहनतकश परिवारों के लिए आजीविका कमाने का एक बड़ा अवसर भी है। गांवों में गेंदे के फूलों की खेती करने वाले किसान, दीपावली जलाने के लिए विशेष जंगली घास तैयार करने वाले ग्रामीण, मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार और मोमबत्तियां तैयार करने वाले छोटे कारोबारी पूरे वर्ष इस त्योहार का इंतजार करते हैं।

दीपावली के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अपने स्थानीय और स्वदेशी उत्पाद लेकर शहरों के बाजारों में पहुंचते हैं। इन वस्तुओं की बिक्री से होने वाली कमाई कई परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनती है।
ऐसे में जिला प्रशासन की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बनती है कि इन छोटे व्यापारियों को दीपावली के पावन अवसर पर शहरों में उचित स्थान उपलब्ध करवाया जाए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी दुकानें सजा सकें और अपने उत्पादों की बिक्री कर सकें।

स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल स्वदेशी परंपरा को जीवित रखना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और छोटे व्यापारियों के चेहरों पर मुस्कान लाने का भी माध्यम है। दीपावली की असली खुशियां तभी सार्थक होंगी, जब इस त्योहार की रोशनी इन मेहनतकश परिवारों के घरों तक भी पहुंचे।
