सुभाष ठाकुर*******
मंडी के टारना में जलशक्ति विभाग के पुराने कार्यालय के स्थान पर पड़ी बड़ी दरारें पहाड़ी के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं। भारी बरसात के कारण बनी इन दरारों से मंडी के मंगवाई और टारना वार्ड के सैकड़ों घर खतरे में आ सकते हैं।
*जलशक्ति विभाग की पाइप लीकेज भी एक कारण*
जलशक्ति विभाग की पेय जल की बड़ी पाइप का रिसाव भी यहीं पर होता रहा है, जिसे अब ठीक कर दिया गया है, लेकिन पहाड़ी के लिए खतरा अभी भी बना हुआ है। वर्ष 2023 में हुई भारी बारिश के दौरान जलशक्ति विभाग की तीन मंजिला भवन को खाली कर दूसरे स्थान पर ले जाया गया था और बाद में भवन को गिरा दिया गया था।

जलशक्ति विभाग के कार्यालय गिराने के बाद वहां पर खाली प्लॉट ही बचा हुआ था, जिस पर अब बहुत बड़ी दरारें आ चुकी हैं। ये दरारें पूरी पहाड़ी के खतरे में होने का संकेत दे रही हैं। जिला प्रशासन और राज्य सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा आपदा का यह दृश्य कहीं सिराज की तरह खौफनाक न बन जाए।
पहाड़ी के नीचे बसे हुए सभी लोगों को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है। विशेषज्ञों की टीम से पहाड़ी का निरीक्षण कर यह जानना होगा कि ये दरारें पहाड़ी के लिए कितना खतरा हो सकती हैं या फिर दरारें बाहरी तौर पर ही हैं। साथ लगते पीपल का एक पेड़ भी टेढ़ा हो चुका है, और दरारें काफी लंबी और गहरी हो चुकी हैं।

जलशक्ति विभाग द्वारा मंडी शहर को उल्ह नदी से ग्रेवती आधारित योजना से 24×7 पेय जल सप्लाई के लिए लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए है। इस योजना का जिन अधिकारियों द्वारा प्रारूप बनाया गया है उस प्रताप अनुसार उन्हीं अधिकारियों द्वारा कार्य नहीं किया , घटिया किस्म के कार्य होने से पाइपों की लीकेज शहर के साथ लगती हुई पहाड़ियों के लिए यह योजना खतरा बन गई है। जलशक्ति विभाग की इस पेय जल योजना से सत्यार्थी सनयार्डी के मोड़ पर पेय जल सप्लाई की दो बड़ी बड़ी पाइपों की लीकेज से दो घर बह चुके हैं और 20 घरों के लिए खतरा बना हुआ है। ऐसे ही टारना की पहाड़ी में भी पेय जल पाईप की लीकेज से यह बड़ा हादसा बना हुआ है।

जिला प्रशासन और राज्य सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और विशेषज्ञों की टीम की मदद से पहाड़ी का निरीक्षण करना चाहिए। पहाड़ी के नीचे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था करनी चाहिए।
टारना की पहाड़ी में बढ़ते खतरे को देखते हुए सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। हमें उम्मीद है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में तुरंत कार्रवाई करेंगे और पहाड़ी के नीचे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
