सुभाष ठाकुर*******
ब्रिटिश हुक्कमत के दौरान निर्मित द्रंग वन विश्राम गृह का ऐतिहासिक महत्व है, लेकिन पठानकोट – मंडी फोरलेन निर्माण के दौरान इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। NHAI द्वारा अवैज्ञानिक पहाड़ी की कटिंग के कारण यह विश्राम गृह खतरे में है। वन विभाग और सरकार को चाहिए कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए कदम उठाएं और इसे फोरलेन की जद में आने से बचाएं।
द्रंग में स्थित वन विश्राम गृह की नाजुक स्थिति को देखते हुए ऐतिहासिक धरोहर बचाने में सभी प्रभावशाली लोग असमर्थ दिखाई दिए है।
द्रंग के इस वन विभाग के ऐतिहासिक विश्राम गृह की सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व मिटने वाला हैं जिसमें बीजेपी और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं द्वारा राजनीतिक जनसभाएं आयोजित कर चुके है लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर बचाने के लिए कोई कदम आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और NHAI के साथ मिलकर इस विश्राम गृह को बचाने के लिए समाधान निकालें। इसके अलावा, स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों को भी इस मुद्दे पर जागरूक करना चाहिए और उन्हें इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए एकजुट होना चाहिए।

*क्या हो सकता है?*
यदि समय रहते इस विश्राम गृह को नहीं बचाया गया, तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए खो जाएगी। इससे न केवल स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत होंगी, बल्कि यह पर्यटन उद्योग के लिए भी एक बड़ा झटका होगा।
*क्या करना चाहिए?*
वन विभाग और सरकार को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और इस विश्राम गृह को बचाने के लिए कदम उठाएं। इसके अलावा, स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों को भी इस मुद्दे पर जागरूक करना चाहिए और उन्हें इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए एकजुट होना चाहिए।
