अमर ज्वाला// नई दिल्ली
भारत सरकार के सांस्कृति मन्त्रालय द्वारा विज्ञानं भवन नई दिल्ली में भारत की ज्ञान बिरासत पर आयोजित ज्ञान भारतम अंतर्राष्ट्रीय समेल्लन में आज मण्डी के कैंसर विशेष्ज्ञ और प्रसिद्ध बिद्वान डॉक्टर पंकज गुप्ता ने हड़प्पा सभ्यता पर लिखी अपनी पुस्तक को केंद्रीय संस्कृति मन्त्री ज्ञानेंद्र सिंह शेखावत और पतंजलि आयुर्वेदिक के सह संस्थापक और प्रबन्ध निदेशक आचार्य बाल कृष्ण को भेंट की। डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने अपनी किताब में हड़प्पा सभ्यता के दौरान लिखी गई पांडुलिपियों के रहस्य को उजागर किया है ।

उन्होंने पाया की हड़प्पा सभ्यता लगभग 8000 साल पुरानी है और यह सभ्यता सिंधु नदी के किनारे विकसित हुई । हड़प्पा सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया सभ्यता से भी पुरानी है ।
हड़प्पा सभ्यता के दौरान लगभग 10 लाख किलोमीटर क्षेत्र में एक पाण्डुलिपि और एक जैसे वेइन्स सिस्टम विद्यमान था। हड़प्पा सभ्यता की पाण्डुलिपि को भारत ,पाकिस्तान , अफ़ग़ानिस्तान ,ईरान ,इराक , सऊदी अरब ,ओमान ,यमन सहित विश्व के बड़े हिस्से में प्रयोग किया जाता रहा है । इस समय की अरबी हस्तलिपि तत्कालीन सिंधु हस्तलिपि से काफी मिलती जुलती है।आधुनिक कोरिया ,थाई , तिब्बती , तेलगु ,कन्नड़ आदि हस्तलिपियाँ हड़प्पा सभ्यता की पांडुलिपियों से काफी समानता रखती हैं
