अमर ज्वाला // चंबा
जिला चंबा के बनीखेत क्षेत्र में स्थित रंजीत सागर डैम में मछलियों के कारोबार के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि संधारा कोपरेटिव सोसायटी अधिकतम बोली लगाने वाले ठेकेदार को टेंडर देने के बजाय पुराने ठेकेदार को कम रेट पर ठेका देने की तैयारी कर रही है।
सोसायटी द्वारा दूर दूर से तीन बार बोली लगाने के लिए ठेकेदारों को बुलाया गया , लेकिन बोली की प्रक्रिया को समय पर पूरा न करने का आरोप सोसायटी पर कुछ ठेकेदारों द्वारा लगाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार सोसायटी द्वारा मछलियों के कारोबार के लिए तीन बार खुले टेंडर के लिए ठेकेदारों को आमंत्रित किया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि कम रेट पर टेंडर दिए जाने से मत्स्य विभाग को मिलने वाली 7.5 प्रतिशत रॉयल्टी में भी कमी आएगी, जिससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है।

मंडी जिले के ठेकेदार आफताब मोहम्मद का कहना है कि वह संधारा कोपरेटिव सोसायटी से 110 रुपये प्रति किलो की दर से मछली खरीदने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार रंजीत सागर डैम के हिमाचल प्रदेश वाले हिस्से से करीब 85 मीट्रिक टन मछलियों का कारोबार किया जा सकता है।
गौरतलब है कि रंजीत सागर डैम का क्षेत्र तीन राज्यों—हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर—में फैला हुआ है। हिमाचल प्रदेश का हिस्सा जिला चंबा के बनीखेत क्षेत्र में आता है, जहां संधारा कोपरेटिव सोसायटी के माध्यम से मछलियों का कारोबार संचालित किया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अधिकतम बोली लगाने वाले ठेकेदार को ही टेंडर दिया जाए तो सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा और विवाद भी समाप्त हो सकता है।
मत्स्य निदेशक का बयान

मत्स्य विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने कहा कि इस मामले की जानकारी उन्हें आज ही मिली है कि जिला चंबा के बनीखेत क्षेत्र में रंजीत सागर डैम में मछलियों के कारोबार के टेंडर को लेकर मामला सामने आया है। उन्होंने बताया कि इस कार्य की देखरेख और संचालन संधारा कोपरेटिव सोसायटी द्वारा किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सोसायटी को यह अधिकार है कि वह टेंडर कब जारी करे और किसे टेंडर दे, लेकिन सोसायटी द्वारा की जाने वाली मछलियों की बिक्री से विभाग को 7.5 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होती है।
विवेक चंदेल ने स्पष्ट किया कि सोसायटी को चाहिए कि जो ठेकेदार मछलियों के लिए सबसे अधिक रेट की बोली लगाए, टेंडर उसे ही दिया जाए। यदि सोसायटी अधिक रेट देने वाले ठेकेदार को टेंडर देने के बजाय कम रेट पर ठेका देती है और इससे विभाग को रॉयल्टी में नुकसान होता है तो ऐसी स्थिति में सोसायटी का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि विभाग इस मामले में दोनों पक्षों—संधारा सोसायटी और ठेकेदारों—की बैठक बुलाएगा, ताकि विवाद का समाधान हो सके और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी करवाई जा सके।
