आईआईटी मंडी और माइंड ट्री स्कूल विवाद उच्च न्यायालय पहुंचा, छात्रों के भविष्य पर संकट के आरोप

अमर उजाला // मंडी

मंडी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी  और द लर्निंग कर्व एजुकेशनल ट्रस्ट (TLCET) के बीच हुए समझौते से जुड़ा विवाद अब हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच गया है। स्कूल प्रबंधन समिति ने शनिवार को मंडी राजमहल में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया है कि संस्थान के हालिया फैसलों से कक्षा नौ से बारह तक के विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ गया है।

स्कूल प्रबंधन द लर्निंग कर्व एजुकेशनल ट्रस्ट के हीरेश मैदान ने प्रेस वार्ता कर आईआईटी के रजिस्ट्रार गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना जानकारी दिए हुए कहा कि उन पर आईआईटी द्वारा वित्तीय संबंधी दवाब ही बना कर अपात्र लोगों की नियुक्ति का बार बार दवाब बनाया गया। लेकिन द्वितीय पक्ष द लर्निंग कर्व एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए आईआईटी के किसी भी दबाव में आकर कोई कार्य नहीं किया जिसके चलते आईआईटी के रजिस्ट्रार द्वारा उन्हें  टर्मिनेट का पत्र जारी कर दिया है।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आईआईटी के साथ हुए समझौता हस्ताक्षर की कॉपी भी मीडिया को जारी की हुई है । समझौता हस्ताक्षर हुए के अनुसार वर्ष 2017 में संस्थान ने अपने परिसर में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालय खोलने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। सभी औपचारिकताओं और संचालन मंडल की मंजूरी के बाद “माइंड ट्री – आईआईटी मंडी परिसर विद्यालय” की स्थापना की गई।

समझौते के तहत संस्थान ने विद्यालय के लिए भूमि, भवन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाईं, जबकि संचालन की जिम्मेदारी ट्रस्ट को सौंपी गई। यह समझौता 33 वर्षों के लिए किया गया था।

साथ ही साथ यह भी समझौता कॉपी में लिखा हुआ है कि  कभी भी आपसी विवाद के दौरान आईआईटी मंडी के निर्देशक आपसी समन्वय करेंगे।  लेकिन प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि जब से आईआईटी के बीच उनका आपसी विवाद शुरू हुआ है इस बीच उन्होंने आईआईटी निर्देशक से मिलने के लिए ई मेल भी किए लेकिन उन्हें निर्देश आईआईटी ने समय ही नहीं दिया।

समझौता कॉपी पर यह भी हस्ताक्षर हुए हैं कि आईआईटी निर्देशक तीन वर्षों के बाद वह बिना किसी कारण कोई भी निर्णय ले सकते हैं । यही नहीं समझाता कॉपी में यह भी लिखा हुआ है कि मामला जिला मंडी न्यायलय के बाहर नहीं होगा।

साल 2022 के बाद बढ़ा विवाद

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार वर्ष 2017 से 2022 तक सभी कार्य सामान्य रूप से चलते रहे, लेकिन 2022 में नई विद्यालय प्रबंधन समिति के गठन के बाद विवाद शुरू हो गया।

प्रबंधन का कहना है कि समिति की भूमिका केवल परामर्श देने की होती है, लेकिन संस्थान के कुछ सदस्यों ने दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया और ऐसे निर्णय थोपे गए जिनसे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी।

ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि बाद में उन पर आर्थिक दबाव बनाया गया। खाली स्थानों पर भी किराया बढ़ाया गया, अनुचित रूप से कर की मांग की गई और अन्य प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न की गईं।

विद्यालय बंद करने का नोटिस

प्रबंधन के अनुसार 6 मई 2024 को संस्थान के रजिस्ट्रार द्वारा बिना स्पष्ट कारण बताए विद्यालय को बंद करने का नोटिस जारी किया गया। इसे मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया गया है।

प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने कई बार कारण जानने और अधिकारियों से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।

विवाद के समाधान न होने पर ट्रस्ट ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। यह मामला वर्तमान में “माइंड ट्री बनाम भारत संघ” के रूप में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रबंधन का कहना है कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तब संस्थान द्वारा एकतरफा कार्रवाई करना अनुचित और अवैध है।

विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता

सबसे बड़ी चिंता कक्षा नौ से बारह तक के विद्यार्थियों को लेकर जताई गई है। प्रबंधन के अनुसार यदि विद्यालय बंद होता है और नया विद्यालय शुरू किया जाता है, तो मान्यता मिलने में कम से कम दो वर्ष लग सकते हैं, जिससे विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं।

संस्थान पर भ्रामक दावों का आरोप

प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया है कि संस्थान सार्वजनिक रूप से विद्यालय को अपने अधीन लेकर कक्षाएं शुरू करने की बात कर रहा है, जबकि मामला न्यायालय में लंबित है।

साथ ही अभिभावकों को शुल्क, पुस्तकें और वर्दी खरीदने से रोकने की सलाह देने से भी विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

न्याय की उम्मीद

विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि माइंड ट्री विद्यालय हमेशा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है और उन्हें न्यायालय से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। साथ ही प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है ताकि उनकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

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क्या बाेले आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार

इस बारे में आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार डाॅ. कुमार संभव पांडेय ने कहा कि इस बारे में प्रबंधन काे अभी तक काेर्ट की तरफ से काेई भी नाेटिस नहीं मिला है और अगर नाेटिस मिलता है ताे आईआईटी मंडी अपना पक्ष काेर्ट में रखेगा।

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