अमर ज्वाला //मंडी:
रविवार को नागचला के एक होटल में डेयरी किसानों की एक बैठक आयोजित की गई । डेयरी किसानों और युवा उद्यमियों ने भाग लेकर डेयरी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। यह बैठक मंडी मिल्क फेडरेशन के बैनर तले आयोजित की गई।
बैठक में किसानों ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए वादों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है, जिससे डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि उन्हें समय पर दूध का भुगतान नहीं मिलने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने सबसे बड़ी समस्या दूध के भुगतान में देरी को बताया। उनका कहना है कि जिस तरह अन्य कर्मचारियों को हर महीने तय तारीख पर वेतन मिलता है, उसी तरह डेयरी किसानों को भी निश्चित समय पर दूध की बिक्री का भुगतान मिलना चाहिए। देरी से भुगतान होने के कारण किसानों को अपने खर्च और ऋण प्रबंधन में दिक्कतें आ रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मात्र 10–12 लीटर तक दूध खरीद की सीमा तय किए जाने की चर्चाएं चल रही हैं। किसानों ने इस पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की और कहा कि इस तरह की अनिश्चितता से उनके व्यवसाय की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसानों ने कहा कि सरकार के प्रोत्साहन से युवाओं ने डेयरी क्षेत्र में निवेश किया, लेकिन अब यदि दूध खरीद में पाबंदियां लगाई जाती हैं तो उनके लिए ऋण चुकाना और परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
बैठक में “मिल्क हॉलिडे” (दूध खरीद बंद होने) की स्थिति को समाप्त करने की मांग की गई। किसानों का कहना है कि यदि किसी प्लांट में तकनीकी खराबी आती है तो वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि दूध का नियमित खरीददारी जारी रहे। एक-दो दिन भी दूध न उठने से किसानों को भारी नुकसान होता है।
डेयरी किसानों ने कहा कि वर्तमान स्थिति में निवेश की सुरक्षा को लेकर असमंजस बना हुआ है। बाजार में यह भी चर्चा है कि कमर्शियल डेयरी फार्मरों से दूध नहीं लिया जाएगा, जिससे किसानों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप
बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार ने दूध के दाम बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के वादे किए थे, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि उन्हें डेयरी फार्म खोलने के लिए प्रोत्साहित किया गया, लेकिन अब उनके उत्पाद की खरीद को लेकर सरकार स्पष्ट व्यवस्था नहीं बना रही है।
