सुभाष ठाकुर*******
चौहार घाटी की सनवाड़ और बथेरी पंचायत में मिल्क फेडरेशन की गाड़ी दूध इक्कठा करने के लिए जाती है, लेकिन पशुपालकों का आरोप है कि उन्हें सरकार द्वारा तय किया हुआ समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि गाड़ी वाले व्यक्ति द्वारा दुर्गम ग्रामीण के लोगों का हावभाव देखकर कुछ लोगों से 50 रूपये तो कुछ लोगों 35 रुपये में दूध खरीदते हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। यही नहीं मिल्क फेडरेशन बालों से पंचायत वासियों द्वारा बार बार मांग की जा रही है कि दूध के फैट को मापने वाली मशीन को लेकर आए लेकिन फेडरेशन वाले बार बार आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं कर रहे लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को झांसा दे कर सौतेला व्यवहार कर रहे है।
प्रदेश सरकार 1अप्रैल 2024 से गाय तथा भैंस के दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य को क्रमश: वर्तमान 38 रुपये से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध को 47 रुपये से 55 रुपये प्रति लीटर के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है ।लेकिन चौहार घाटी के किसानों और पशुपालकों के साथ सौतेला व्यवहार होता है।
पशुपालकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में दूध की बिक्री न के बराबर होने के कारण वे मजबूर हैं और मिल्क फेडरेशन की गाड़ी के इस सौतेले व्यवहार को सहन करने को मजबूर हुए हैं।
जब इस मामले में मिल्क फेडरेशन के मैनेजर विश्वकांत शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वे गुजरात में हैं और लिखित में शिकायत भेजने को कहा। पशुपालकों का कहना है कि जब मिल्क फेडरेशन के मैनेजर ही उनकी समस्या सुनने को तैयार नहीं हैं, तो वे कहां जाएं। वहीं राज्य सरकार मंच से दूध के समर्थन मूल्य योजना वृद्धि का प्रचार बड़े जोरो शोरों से करते आ रहे हैं। जमीनी कहीकत बिल्कुल भिन्न है।
पशुपालकों ने हिमाचल सरकार के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर से मांग की है कि इस मामले में जांच की जाए और मिल्क फेडरेशन के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
